मंत्रालय ने कहा कि नियमित पॉलिसी की तुलना में ये पॉलिसी 70:30 और 50:50 प्रीमियम शेयरिंग के लिए क्रमशः 28 प्रतिशत और 42 प्रतिशत की छूट पर उपलब्ध होगी।
वित्त मंत्रालय ने भी कॉरपोरेट शासन की सर्वोत्तम प्रथाओं को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए बैंकों और बीमा कंपनियों को ग्राहकों को बीमा पॉलिसियों की 'गलत-बिक्री' के प्रति बार-बार आगाह किया है।
राज्य सरकार ने सभी नागरिकों को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देने की घोषणा की है। इस योजना के तहत 3 करोड़ लोगों को सरकारी और निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा। अगले 3–4 महीनों में लाभार्थियों को हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे।
हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी एक अच्छा विकल्प हो सकता है, खासकर जब आप बेहतर कवरेज या सेवा की तलाश में हैं। लेकिन इसे अपनाने से पहले इसके नियम, संभावित बढ़ी हुई लागत और नई शर्तों को समझ लेना जरूरी है।
वित्त मंत्री ने इस साल के बजट भाषण में, नई पीढ़ी के वित्तीय क्षेत्र सुधारों के तहत बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को मौजूदा के 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा था।
जीएसटी हटने के बाद आपकी अच्छी खासी रकम बचने वाली है। 22 सितंबर से अब जो भी निजी लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रिन्यु होगी, लोगों को जीएसटी की रकम नहीं चुकानी होगी। इससे बड़ी राहत मिलेगी।
जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में हुए इस फैसले से प्रीमियम में कटौती होगी जिससे बिक्री में बढ़ोतरी संभव होगा। इससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।
बीमा लोकपाल परिषद (CIO) की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के नाम और उनके खिलाफ आई शिकायतों का जिक्र है।
हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की सेवाओं से परेशान होकर हर साल हजारों लोग बीमा लोकपाल में इनकी शिकायत दर्ज कराते हैं। शिकायतों के आधार पर बीमा लोकपाल परिषद (CIO) की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट में सबसे ज्याजा शिकायतों वाली 5 कंपनियों की पहचान हुई है।
AHPI ने आरोप लगाया कि बजाज आलियांज ने कई सालों पुराने कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर अस्पतालों को भुगतान दरें तय कर रखी हैं और बढ़ती चिकित्सा लागत के अनुरूप इसमें बदलाव करने से इनकार कर रही है।
भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण जल्द ही इस प्रस्ताव पर एक परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) जारी करेगा, जिसमें स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे जाएंगे। बीमा कंपनियां, उपभोक्ता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसमें भाग लेंगे।
दोनों पॉलिसियां अलग-अलग जरूरतों को पूरा करती हैं और दोनों का होना आपके वित्तीय भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी है। लेकिन दोनों के बीच के फर्क को अगर पहले ही समझ लिया जाए तो आगे कोई पछतावा नहीं होगा।
गरीब औद जरूरतमंद लोगों के लिए आयुष्मान कार्ड वरदान साबित हुआ है। इससे लाखों लोगों को बड़ी बचत हो रही है।
अगर आप किसी पॉलिसी वर्ष में कोई क्लेम नहीं करते हैं, तो बीमा कंपनियां अगले वर्ष आपके बीमा राशि (sum insured) में बढ़ोतरी करती हैं। यह नो-क्लेम बोनस कहलाता है।
ऐसी कंपनी से पॉलिसी लें जो आपके आसपास के नेटवर्क अस्पतालों में इलाज की सुविधा देती हो। नेटवर्क अस्पतालों में इलाज कराने से आपको कैशलेस सुविधा मिलती है, और कई बार इससे प्रीमियम में भी कमी आ सकती है, अक्सर लगभग 15% तक।
स्वास्थ्य बीमा और मेडिक्लेम दोनों ही मेडिकल खर्च के लिए कवरेज प्रदान करते हैं लेकिन वे दायरे और सुविधाओं के मामले में काफी अलग हैं। दोनों अलग-अलग मकसद की पूर्ति करते हैं।
पॉलिसी को 2 साल के लिए रिन्यू करें। ऐसा करके आप पॉलिसी के प्रीमियम में आसानी से छूट पा सकते हैं। बीमा कंपनियां बीमाधारकों को प्रोत्साहित करने के लिए दो साल के प्रीमियम के एकमुश्त भुगतान पर डिस्काउंट देती हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस जल्दी खरीदकर, आप सुनिश्चित करते हैं कि आप उम्र बढ़ने के साथ कई संभावित चिकित्सा खर्चों के लिए पूरी तरह से कवर हैं। आप जितनी देर करेंगे, व्यापक कवरेज हासिल करने के लिए आपके पास उतने ही कम विकल्प होंगे।
झारखंड के वकीलों को स्वास्थ्य बीमा योजना का कवच मिलेगा। योजना को लांच करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अधिवक्ताओं के लिए सरकार 6,000 रुपये का वार्षिक प्रीमियम देगी।
हाईकोर्ट की पीठ ने फैसला सुनाया कि हमारे विचार में, मेडिक्लेम पॉलिसी के तहत दावेदार द्वारा हासिल किसी भी राशि की कटौती स्वीकार्य नहीं होगी।
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