1. Hindi News
  2. पैसा
  3. मेरा पैसा
  4. Glenmark ने भारत में पेश की ये एंटीडायबिटिक दवा, जानें कीमत, थेरेपी की लागत लगभग 70% कर देगी कम

Glenmark ने भारत में पेश की ये एंटीडायबिटिक दवा, जानें कीमत, थेरेपी की लागत लगभग 70% कर देगी कम

 Published : Jan 03, 2024 11:39 am IST,  Updated : Jan 03, 2024 11:47 am IST

कंपनी ने कहा है कि दवा ने डायग्नोस्टिक ​​परीक्षणों में रोगियों के बीच हृदय और गुर्दे की सुरक्षा परिणामों पर पॉजिटिव असर डाला है, जिससे यह टाइप 2 मधुमेह मेलिटस वाले रोगियों के लिए इलाज का एक प्रभावी ऑप्शन बन गया है।

दवा का मार्केटिंग ब्रांड नाम लिराफिट के तहत किया जा रहा है। - India TV Hindi
दवा का मार्केटिंग ब्रांड नाम लिराफिट के तहत किया जा रहा है। Image Source : REUTERS

दवा बनाने वाली कंपनी ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने बुधवार को भारत में पॉपुलर एंटीडायबिटिक दवा लिराग्लूटाइड का बायोसिमिलर लॉन्च किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से मंजूरी मिलने के बाद इस दवा का मार्केटिंग ब्रांड नाम लिराफिट के तहत किया जा रहा है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, लिराफिट दवा की 1 स्टैंडर्ड खुराक की कीमत लगभग 100 रुपये है।

थेरेपी की लागत लगभग 70 प्रतिशत कम कर देगी

खबर के मुताबिक, कंपनी ने दावा किया कि 2 मिलीग्राम (प्रति दिन) और थेरेपी की लागत लगभग 70 प्रतिशत कम कर देगी। लिराफ़िट सिर्फ नुस्खे के तहत उपलब्ध होगा। ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स के चेयरमैन और बिजनेस हेड इंडिया फॉर्मूलेशन, आलोक मलिक ने कहा कि डायग्नोस्टिक ​​परीक्षणों से पता चला है कि यह एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों (एएससीवीडी) और मोटापे के साथ-साथ वयस्क टाइप 2 मधुमेह रोगियों में ग्लाइसेमिक कंट्रोल में सुधार करने में मदद करता है।

इलाज का एक प्रभावी ऑप्शन

मलिक ने कहा कि लिराग्लूटाइड ने डायग्नोस्टिक ​​परीक्षणों में रोगियों के बीच हृदय और गुर्दे की सुरक्षा परिणामों पर पॉजिटिव असर डाला है, जिससे यह टाइप 2 मधुमेह मेलिटस वाले रोगियों के लिए इलाज का एक प्रभावी ऑप्शन बन गया है। मलिक ने कहा कि इस लॉन्च के साथ, अब हमने मधुमेह चिकित्सा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इंजेक्टेबल एंटीडायबिटिक बाजार में कदम रखा है।

ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के हर निवेशक को सबसे शक्तिशाली शेयरधारक समूहों के बारे में पता होना चाहिए। कंपनी में सबसे ज्यादा शेयर रखने वाला समूह, यानी सटीक रूप से लगभग 47 प्रतिशत प्राइवेट कंपनियां हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो, समूह को अधिकतम नकारात्मक जोखिम का सामना करना पड़ता है। संस्थाएं कंपनी के 32% शेयरधारक हैं। संस्थानों के पास अक्सर ज्यााद स्थापित कंपनियों में शेयर होते हैं, जबकि अंदरूनी सूत्रों के पास छोटी कंपनियों में भी हिस्सेदारी होना असामान्य नहीं है

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Personal Finance से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा