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घर खरीदने की बजाय किराये पर रहने के क्या फायदे मिलते हैं? आपने किया है गौर?

 Published : Apr 02, 2025 08:24 am IST,  Updated : Apr 02, 2025 08:24 am IST

किराए पर रहने का एक फायदा यह भी है कि अगर मौजूदा जीवन-यापन लागत बहुत ज़्यादा है, तो आप अपने घर को छोटा कर सकते हैं। किराये के मकान में रहने पर आप HRA का दावा कर सकते हैं।

किराए पर लेने या खुद का घर लेने का फैसला व्यक्तिपरक है और इस पर सावधानीपूर्वक विचार के बाद ही फैसला - India TV Hindi
किराए पर लेने या खुद का घर लेने का फैसला व्यक्तिपरक है और इस पर सावधानीपूर्वक विचार के बाद ही फैसला करना चाहिए। Image Source : PIXABAY

घर खरीदना या किराये पर रहना काफी हद तक एक निजी फैसला है या निजी चाहत है। इसमें कोई शक नहीं। लेकिन प्रॉपर्टी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के चलते घर खरीदना हमेशा प्रैक्टिकल नहीं होता है। वहीं, आप जब किराये पर रहते हैं तो आपको तुलनात्मक रूप से किफायती रेंट पर बेहतर, ज्यादा जगह वाला और सुविधाओं से भरा आवास मिल जाता है। कई लोग ऐ्से भी हैं जो किराये के मकान में रहना पसंद करते हैं। वह घर नहीं खरीदना चाहते। अगर आप अत्यधिक कीमत वाले रियल एस्टेट बाजार, लंबी कानूनी प्रक्रिया और भारी मासिक ईएमआई जैसी परिस्थितियों से बचना चाहते हैं तो किराएदार होना संपत्ति के मालिक होने से बेहतर वित्तीय सौदा साबित हो सकता है। अगर आप किराये के मकान में रहते हैं तो आइए जानते हैं इसके आखिर क्या फायदे मिलते हैं।

मेंटेनेंस का खर्च कम है

जब आप किराये के मकान में रहते हैं तो सबसे पहला फायदा मिलता है कि आपको मेंटेनेंस का खर्च काफी कम देना होता है। जैसे एक किरायेदार के तौर पर आप उस किराये के मकान के बुनियादी रखरखाव (मेंटेनेंस) के लिए कुछ चार्ज दे सकते हैं, लेकिन बड़ी मरम्मत या क्षति के लिए आपको कुछ सोचना नहीं होता। ये जिम्मेदारी उस मकान के मालिक की है। मकान मालिक को हो सकता है, होम लोन सहित अन्य मरम्मत या मेंटेनेंस के लिए खर्च करना होगा।

जहां चाहें वहां रहने की आजादी

किराये के मकान में रहने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि आप अपनी पंसद के लोकेशन पर जब मर्जी घर बदल सकते हैं। यह घर के मालिक होने की तुलना में आपको अधिक लचीलापन देता है। यह वैसे लोगों के लिए आदर्श है जो अक्सर नौकरी बदलते हैं। किराएदार को बस इतना करना होता है कि मकान खाली करने से पहले एक महीने का नोटिस देना होता है। किराए पर लेने के लिए किराएदार से किसी लंबी अवधि की प्रतिबद्धता की जरूरत भी नहीं होती है।

किराये पर टैक्स छूट का लाभ

किराये के मकान में रहने का आप वित्तीय लाभ भी ले सकते हैं। आप हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA का दावा कर सकते हैं। 99acres के मुताबिक, मेट्रो शहरों में किराएदार अपने मूल वेतन का लगभग 50 प्रतिशत और टियर II या टियर III शहरों में 40 प्रतिशत तक का दावा कर सकते हैं, जो एक खास वित्तीय लाभ प्रदान करता है। जबकि मकान मालिक को संपत्ति के स्थान के आधार पर, घर के मालिकों को वार्षिक संपत्ति कर भी देना होता है।

ज्यादा सुविधाएं मिलती हैं

किराए पर रहने का एक और वित्तीय फायदा यह है कि आपको ऐसी सुविधाएं मिलती हैं जो अन्यथा एक बड़ा खर्च हो सकता है। पूल, जिम या स्पोर्ट्स कोर्ट जैसी सुविधाएं आमतौर पर मध्यम से हाई लेवल रेसिडेंशियल सोसाइटी में उपलब्ध होती हैं। कई मामलों में, संपत्ति का मालिक एकमुश्त मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान करता है, जिसमें इन सभी सुविधाओं तक पहुंचने के लिए फ्री मेंबरशिप भी शामिल हो सकती हैं।

कोई एडवांस निवेश नहीं

प्रॉपर्टी खरीदते समय, लोन लेने से पहले मालिक को भारी डाउन पेमेंट करना पड़ता है। इसके बाद, प्रॉपर्टी के प्रकार या जीवनशैली के विकल्पों के आधार पर, मालिक को इंटीरियर डेकोर, फर्नीचर आदि पर अधिक खर्च करना पड़ता है। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस जैसे प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान सीधे मालिक की जेब से होता है। जबकि किरायेदार को इन जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए एडवांस में कोई निवेश नहीं करना पड़ता है। किराएदार द्वारा चुकाई जाने वाली एकमात्र एडवांस लागत सिक्योरिटी डिपोजिट है। वह भी मकान खाली करते समय वापस की जाती है।

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