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ऑटोमोबाइल और स्टील को छोड़कर, भारत के लगभग सभी सामानों (93 प्रतिशत से ज्यादा) को यूरोपीय संघ में जीरो-टैरिफ के साथ एंट्री मिलेगी।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक और व्यापारिक तनाव के बीच निवेशकों की मजबूत मांग और वैश्विक तेजी के कारण दोनों कीमती धातुएं रिकॉर्ड-तोड़ तेजी के साथ रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं।
समझौते के तहत, यूरोप से आने वाली महंगी वाइन पर वसूला जाने वाला टैक्स अगले 7 सालों में 150 प्रतिशत से घटकर 20-30 प्रतिशत हो जाएगा।
भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ के बीच हुए एफटीए के तहत यूरोप से इंपोर्ट होने वाली लग्जरी गाड़ियों पर वसूला जाने वाला सीमा शुल्क यानी कस्टम ड्यूटी 110 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 10 प्रतिशत रह जाएगा।
अवसंरचना समिति ने 35 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन-8 परियोजना को मंजूरी दी, जिसकी अनुमानित लागत 22,862 करोड़ रुपये है।
भारत अभी यूरोप से आयात की जाने वाली 40,000 डॉलर से कम कीमत वाली यात्री कारों पर 70 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाता है, जबकि 40,000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाली कारों पर 110 प्रतिशत का भारी-भरकम सीमा शुल्क वसूलता है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए इस ऐतिहासिक एफटीए को लेकर जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि इस समझौते के तहत परिधान, रसायन और जूते-चप्पल जैसे कई घरेलू क्षेत्रों को 27 देशों के इस समूह में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा।
आज बाजार में कारोबार शुरू होने के बाद से ही उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था, लेकिन बाजार बंद होने से महज कुछ मिनट पहले जोरदार तेजी देखने को मिली।
भारत और EU के बीच मौजूदा समय में सालाना 180 अरब यूरो से अधिक का व्यापार होता है। इस डील से यूरोप के साथ-साथ भारतीय ग्राहकों को भी बड़ा फायदा मिलने वाला है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि आज एक और ऐतिहासिक अवसर है।
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