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ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने एलपीजी यानी रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं और जरूरत के आधार पर इसकी खुदरा कीमतों में कटौती या बढ़ोतरी की जाती है।
सिर्फ जनवरी महीने में डिफेंस कंपनियों के शेयरों ने 23% तक की तेजी दर्ज की है। माना जा रहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में संभावित डिफेंस बजट बढ़ोतरी सेक्टर के लिए दीर्घकालिक रूप से सकारात्मक रहेगी।
यूपी ने ये मुकाम हासिल करने के लिए अपनी पॉलिसी में कई बदलाव किए, जिनमें जबरदस्त प्रशासनिक सुधार, नियमों को आसान बनाना शामिल है।
सेबी ने कहा कि इस प्रक्रिया में आमतौर पर लगभग 150 दिन लगते हैं। ऐसे में निवेशकों की सुविधा बढ़ाने और समय तथा जोखिम को कम करने के लिए एलओसी जारी करने की जरूरत को खत्म करने का फैसला लिया गया है।
एग्रीकल्चर इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों का कहना है कि इस बजट में सेक्टर की पूरी क्षमता को अनलॉक करने के लिए टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट रेजिलिएंस, क्रेडिट फ्लो, वैल्यू-एडेड प्रोडक्शन और बेहतर सप्लाई-चेन को प्राथमिकता देने की खास जरूरत है।
एक्सपर्ट्स ने कहा कि बजट 2026 में रक्षा को रणनीतिक रूप से मुख्य केंद्र में रखने की उम्मीद है, जिसमें ज्यादा पूंजीगत खर्च, तेजी से स्वदेशीकरण और टेक्नोलॉजी-आधारित क्षमता निर्माण पर जोर दिया जाएगा।
रक्षा पूंजीगत खर्च, जिससे आधुनिकीकरण और नई खरीद को फंड मिलता है, उसमें भी बढ़त दर्ज की गई है। ये 2015-16 में 83,614 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 1.92 लाख करोड़ रुपये हो गया।
परवीन गुप्ता ने कहा कि आधुनिक निर्माण तकनीकों, प्री-फैब्रिकेशन और सस्टेनेबल बिल्डिंग प्रैक्टिसेज को बढ़ावा देने से उत्पादकता बढ़ेगी और लागत में कमी आएगी।
डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने कहा कि यूनियन बजट से पहले मेडिकल टेक्नोलॉजी और सर्जिकल रोबोटिक्स सेक्टर एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है।
NSE की लिस्टिंग योजना की समीक्षा के लिए मार्च 2025 में सेबी ने एक आंतरिक समिति का गठन भी किया था। अब NOC जारी होने के साथ ही NSE के IPO का रास्ता लगभग साफ होता नजर आ रहा है।
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