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भगवंत मान सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' बनी वरदान, 65 साल की मां के घुटनों का हुआ मुफ्त ऑपरेशन

 Published : May 04, 2026 06:39 pm IST,  Updated : May 04, 2026 06:43 pm IST

बुजुर्ग मां का इलाज सफल होने के बाद महिला के बेटे की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। यह योजना राज्य के जरूरतमंद लोगों को मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रही है।

65 साल की मां के घुटनों का मुफ्त इलाज- India TV Hindi
65 साल की मां के घुटनों का मुफ्त इलाज Image Source : REPORTER INPUT

पंजाब के होशियारपुर जिले के दसूहा क्षेत्र में स्थित गांव पनवा की 65 वर्षीय केवल कौर के जीवन में 17 अप्रैल का दिन बहुत खुशियां लेकर आया। पिछले कई सालों से वह घुटनों के असहनीय दर्द से जूझ रही थी, जिसके कारण उसकी दुनिया केवल दर्द तक सीमित होकर रह गई थी। वह बिना सहारे के चल नहीं सकती थी और हर दिन संघर्ष जैसा लगता था। आज, केवल कौर फिर से अपने पैरों पर खड़े होने की ओर बढ़ रही है, वह भी बिना किसी आर्थिक बोझ के जिसका श्रेय भगवंत मान सरकार की स्वास्थ्य पहल को जाता है।

पहले ऑपरेशन में आता था 1.5 लाख का खर्च

'मुख्यमंत्री सेहत योजना' के तहत उनके घुटनों का ऑपरेशन 'पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' जालंधर में सफलतापूर्वक किया गया। कभी परिवार को यह इलाज आर्थिक रूप से पहुंच से बाहर लगता था क्योंकि ऑपरेशन पर पहले लगभग 1.5 लाख रुपये का खर्च होता था, जो अब बिल्कुल मुफ्त किया गया।

लगभग पांच साल तक दर्द में रहीं

केवल कौर के बेटे मनदीप सिंह, जो किसान है, इन मुश्किल समयों को याद करते हुए भावुक हो जाता है। लगभग पांच साल तक उसकी मां लगातार दर्द में रही। उन्होंने कई डॉक्टरों से सलाह की, दवाइयां लीं, लेकिन कोई स्थायी राहत नहीं मिली। आखिरकार हालत ऐसी हो गई कि बिना सहारे के एक कदम भी चलना मुश्किल हो गया। वह बताते हैं, 'जब मेरी माता जी पूरी तरह से निर्भर हो गए, तब सर्जरी ही एकमात्र उम्मीद थी।'

बनवाया था हेल्थ कार्ड

मनदीप ने पहले अखबार में इस योजना के बारे में पढ़ा था और हेल्थ कार्ड बनवाया, जो उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। अस्पताल की प्रक्रियाओं के बाद 17 अप्रैल को डॉक्टर अनित सच्चर और उनकी टीम ने लगभग दो घंटे की प्रक्रिया में सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की।

अब रिकवरी शुरू हो चुकी है, और साथ ही आत्म-सम्मान तथा सुकून की वापसी भी। हालाँकि टाँके अभी लगे हुए हैं और जल्द ही काट दिए जाएँगे, लेकिन जो दर्द वर्षों से उनके जीवन का हिस्सा था, वह अब कम होने लगा है।

भावुक होकर केवल कौर कहती हैं, 'मुख्यमंत्री भगवंत मान मेरे लिए तीसरे बेटे के समान हैं। मेरा ऑपरेशन बिना एक पैसा खर्च किए हो गया। अब मैं किसी पर बोझ नहीं हूँ। जिंदगी अब आसान होगी।'

इस योजना ने आजादी और सम्मान दिया

परिवार के लिए यह सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि आत्म-सम्मान की वापसी थी। मनदीप बताते हैं कि भले ही उनके बच्चे विदेश में रहते हैं और आर्थिक मदद भी संभव थी, लेकिन इस योजना ने उन्हें आज़ादी और सम्मान दिया। उन्होंने यह भी बताया कि केवल कौर के साथ मोहाली, होशियारपुर और आसपास के गांवों के लगभग पांच अन्य बुजुर्ग मरीजों का भी इसी योजना के तहत घुटनों का ऑपरेशन हुआ। शुरुआती टेस्टों में लगभग 2,400 रुपये का खर्च आया, लेकिन पूरा इलाज मुफ्त रहा।

किसी वरदान से कम नहीं है ये योजना

मनदीप के अनुसार, इस योजना के तहत ₹10 लाख तक का मुफ्त इलाज गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। केवल कौर की कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि जब सही समय पर सही मदद मिलती है, तो वह सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं लौटाती, बल्कि उम्मीद, आत्म-सम्मान और जीवन जीने की इच्छा भी वापस लौटाती है।

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