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राजस्थान सरकार की तिजोरी में धूल फांक रहा 64 करोड़ रुपये का सोना-चांदी, CAG की रिपोर्ट में खुलासा

 Reported By: Manish Bhattacharya Written By: Malaika Imam
 Published : Jul 15, 2026 01:22 pm IST,  Updated : Jul 15, 2026 01:22 pm IST

यह सोना-चांदी अलग-अलग आपराधिक मामलों में पुलिस और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जब्त किया गया था। अदालतों ने इसे सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया था।

सरकारी तिजोरी में वर्षों से बंद है 64.44 करोड़ रुपये का सोना-चांदी- India TV Hindi
सरकारी तिजोरी में वर्षों से बंद है 64.44 करोड़ रुपये का सोना-चांदी Image Source : PTI

राजस्थान के सरकारी खजाने में 64.44 करोड़ रुपये का सोना-चांदी वर्षों से पड़ा हुआ है, लेकिन उसका नियमानुसार निस्तारण अब तक नहीं हो पाया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा समीक्षा रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, अपराधियों से जब्त की गई और बाद में न्यायालय की ओर से राजकीय संपत्ति घोषित की गई बहुमूल्य सामग्री लंबे समय से सरकारी कोषागार में जमा है, लेकिन उसे सरकार के निर्धारित नियमों के अनुसार न तो बेचा गया और न ही उपयोग में लाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, जयपुर स्थित राज्य के रिजर्व कोषागार में 29.011 किलो सोना और 972.747 किलो चांदी रखी हुई है। मौजूदा बाजार भाव के आधार पर इसकी अनुमानित कीमत 64.44 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें सोने का मूल्य करीब 42.36 करोड़ रुपये और चांदी का मूल्य 22.08 करोड़ रुपये बताया गया है।

64.44 करोड़ कुल अनुमानित कीमत 

  • सोना- 29.011 किलोग्राम (अनुमानित मूल्य- करीब 42.36 करोड़ रुपये)
  • चांदी- 972.747 किलोग्राम (अनुमानित मूल्य- करीब 22.08 करोड़ रुपये)

CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह सोना-चांदी पुलिस और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा जब्त किया गया था। बाद में अदालतों ने इन्हें राजकीय संपत्ति घोषित कर दिया। वित्त विभाग ने इनकी वैल्यूएशन भी करवा ली, लेकिन मई 2025 तक भी इनका निस्तारण नहीं किया गया।

क्या कहते हैं नियम, कहा अटकी फाइल?

राजस्थान कोषागार नियमावली- 2012 के नियम 122 के तहत जयपुर (शहर) को राज्य का रिजर्व कोषागार घोषित किया गया है। सामान्य और आपराधिक मामलों में न्यायालयों द्वारा राजकीय संपत्ति घोषित किए गए सोना, चांदी, हीरे और अन्य बहुमूल्य सामान यहीं जमा कराए जाते हैं।

नियमों के अनुसार, पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं पुरातत्व विभाग को सौंपी जानी चाहिए, जबकि सोना-चांदी जैसी बहुमूल्य धातुओं को मुंबई स्थित सरकारी टकसाल भेजकर शुद्ध धातु में परिवर्तित कराने के बाद उनकी बिक्री की जानी चाहिए। लेकिन CAG ने पाया कि वैल्यूएशन होने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और करोड़ों रुपये की संपत्ति वर्षों से सरकारी तिजोरी में बंद पड़ी है। इसे गंभीर वित्तीय लापरवाही मानते हुए CAG ने राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने और नियमों के अनुरूप जल्द निस्तारण सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।

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