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Margshirsha Purnima 2025: कब है मार्गशीर्ष पूर्णिमा 4 या 5 दिसंबर? जानें सही डेट और लक्ष्मी पूजन का शुभ समय

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Nov 30, 2025 12:26 pm IST,  Updated : Nov 30, 2025 12:26 pm IST

Margshirsha Purnima 2025: मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत और पूजन दिसंबर के माह में किया जाएगा। इस दिन चंद्रमा के दर्शन करना और लक्ष्मी पूजन करना बेहद शुभ माना जाता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं पूर्णिमा के दिन के शुभ मुहूर्त के बारे में।

Margshirsh Purnima 2025- India TV Hindi
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025 Image Source : INDIA TV

Margshirsha Purnima 2025: मार्गशीर्ष माह की पूर्णिणा तिथि दिसंबर माह में आएगी। मार्गशीर्ष पूर्णिमा को स्नान-दान और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन माता लक्ष्मी  और भगवान विष्णु का पूजन करना भी शुभ फलदायक माना जाता है। यह दिन आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए भी बेहद खास माना जाता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि दिसंबर के माह में मार्गशीर्ष पूर्णिमा किस दिन है और लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ समय कब रहेगा। 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा कब है? 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 4 दिसंबर को सुबह 8 बजकर 37 मिनट से होगी वहीं 5 दिसंबर की सुबह 4 बजकर 43 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। यानि दिन के समय पूर्णिमा तिथि 4 दिसंबर को ही रहेगी इसलिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत और लक्ष्मी पूजन 4 दिसंबर को करना ही सही माना जाएगा। 

स्नान दान के लिए शुभ समय 

पूर्णिमा के दिन सुबह 8 बजकर 37 मिनट से दोपहर 2 बजकर 54 मिनट तक रवि योग रहेगा। वहीं दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक शिव योग भी इस दिन रहेगा। इसलिए दोपहर 2 बजकर 54 मिनट तक आप स्नान दान कर सकते हैं। 

लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर प्रदोष काल में माता लक्ष्मी की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। 4 दिसंबर की शाम 6 बजे से लेकर 7 बजकर 18 मिनट तक लक्ष्मी पूजन के लिए समय सबसे शुभ माना जा रहा है। इस दिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ, माता लक्ष्मी के मंत्रों का जप और ध्यान करने से शुभ फल आपको प्राप्त होते हैं।

पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय

पूर्णिमा के चंद्रमा का दर्शन करना और इस दिन चंद्रमा को जल का अर्घ्य देने से आपको मानसिक शांति और पारिवारिक जीवन में खुशियां प्राप्त होती हैं। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम 4 बजकर 35 मिनट पर होगा। हालांकि, चंद्रमा को अर्घ्य आपको शाम 6 बजे के बाद ही देना चाहिए जब चंद्रमा का प्रकाश आकाश में फैला हो। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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