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15 या 16 अगस्त आखिर कब मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी? जानें सही डेट और शुभ मुहूर्त

 Published : Aug 10, 2025 08:21 am IST,  Updated : Aug 10, 2025 08:21 am IST

कृष्ण जन्माष्टमी देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे में इस साल कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी और शुभ मुहूर्त क्या है आइए जानते हैं...

कृष्ण जन्माष्टमी,  Krishna Janmashtami- India TV Hindi
कृष्ण जन्माष्टमी Image Source : UNSPALSH

भाद्रपद माह आरंभ हो चुका है, इसी माह में कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ ता। यह कारण है कि हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र पर कृष्ण जन्माष्टमी बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। हर वर्ष इस पावन दिन पर भगवान कृष्ण के बाल रूप की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी?

विद्वानों की मानें तो 2025 में भगवान श्री कृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। अगर द्रिक पंचांग की मानें तो 15 अगस्त की रात 11.49 बजे भाद्रपद माह की कृष्णी पक्ष अष्टमी तिथि लग जाएगी और यह 16 अगस्त की रात 09.24 बजे तक रहेगी। वहीं, रोहिणी नक्षत्र का आरं 17 अगस्त की सुबह 04.38 बजे होगा। ऐसे में इस साल जन्माष्टमी तिथि को लेकर लोग असमंजस में है कि आखिर यह 15 अगस्त या फिर 16 अगस्त को मनाया जाएगा।

विद्वानों का मानना है कि अगर किसी ऐसी स्थिति बने कि जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का मिलन नहीं हो रहा हो, तब उदयातिथि को मान्यता देकर जन्माष्टमी मनाई जा सकती है। ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक, 16 अगस्त 2025 को पूरे देश में जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

शुभ मुहूर्त

  • रात में पूजा का समय- 16 - 17 अगस्त की मध्य रात 12.04 बजे से 12.47 बजे तक।
  • व्रत पारण का समय- 17 अगस्त के दिन सुबह 05.51 बजे
  • मध्यरात्रि का क्षण- 16 - 17 अगस्त की मध्य रात 12.25 बजे
  • चंद्रोदय का समय- 16 अगस्त की रात 11.32 बजे

इस दिन जरूर करें ये काम

16 अगस्त यानी जन्माष्टमी के दिन व्रत रखें और आधी रात को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं। रात में 12 बजे श्री कृष्ण का जन्म के समय दूध से स्नान कराएं और फिर भगवान को जल से नहलाएं। अब साफ कपड़े से पोछें और उनके लिए लाए गए विशेष वस्त्र धारण कराएं और फिर उन्हें फूल-माला आदि के पालना पर बिठाएं और झूला झुलाएं। इसके बाद उन्हें माखन, मिश्री,पचांमृत और तुलसीदल का भोग लगाएं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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