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Ayudha Puja 2025 Muhurat, Vudhi: आयुध पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा? जानिए दशहरा पर क्यों होती है शस्त्र पूजा

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Sep 30, 2025 06:32 pm IST,  Updated : Oct 01, 2025 10:28 am IST

Ayudha Puja 2025 Muhurat, Vudhi: विजयादशमी पर्व शस्त्र पूजा का विशेष महत्व है। दशहरे पर होने वाली आयुध पूजा को वीरता, सुरक्षा और शक्ति का पूजन माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन अपने शस्त्र आदि की पूजा करने से देवी मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में पूरे साल सुख-समृद्धि बनी रहती है।

आयुध पूजा 2025- India TV Hindi
आयुध पूजा 2025 Image Source : PTI

Ayudha Puja 2025 Muhurat: शारदीय नवरात्रि की समाप्ति विजयादशमी के साथ होती है। नौ दिनों तक शक्ति के आराधना के बाद दशमी तिथि बहुत ही खास होती हैं। दशहरा पर्व देश के कई राज्यों में शस्त्र पूजा का विशेष महत्व है। इस परंपरा के तहत वाहनों और आजीविका के दौरान काम आने वाले औजारों और उपकरणों की पूजा करने का विधान है, जिसे आयुध पूजा (Ayudha Puja) भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन अपने शस्त्र आदि की पूजा करने से देवी मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में पूरे साल सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस बार नवरात्रि का त्योहार पूरे 10 दिनों का है। चलिए जानते हैं कि आयुध पूजा कब है?और इसका क्या महत्व है?

आयुध पूजा 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त (Ayudha Puja 2025 muhurat)

  • आयुध पूजा मुहूर्त - 02:09 पी एम से 02:57 पी एम
  • मैसूर दशहरा बृहस्पतिवार, अक्टूबर 2, 2025 को
  • नवमी तिथि प्रारम्भ - 30 सितम्बर 2025 को 06:06 पी एम बजे
  • नवमी तिथि समाप्त - 01 अक्टूबर 2025 को 07:01 पी एम बजे

आयुध पूजा की सही विधि

दशहरे पर होने वाली आयुध पूजा को वीरता, सुरक्षा और शक्ति का पूजन माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थान की साफ-सफाई करें। आश्विन शुक्ल दशमी को पहले अपराजिता का पूजन किया जाता है। इसके बाद सभी शस्त्रों, औजारों, वाहनों और उपकरण कि जैसे तलवार, बंदूक, धनुष-बाण, वाहन, मशीनरी आदि को साफ करें और इन्हें साफ वस्त्र बिछाकर उस पर व्यवस्थित तरीके से रखें।

इसके बाद इन पर गंगाजल छिड़कें और हल्दी, चंदन और अक्षत से तिलक करें और फूल चढ़ाएं अर्पित करें। शस्त्रों पर मौली बांधें। इस दौरान 'शस्त्र देवता पूजनम्, रक्षा कर्ता पूजनम्' मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद माता का ध्यान करते हुए दीपक जलाकर धूप और नैवेद्य अर्पित करें। 

इस मंत्र का करें उच्चारण- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

इसके बाद आरती करें। अब दोनों हाथों से मां काली का ध्यान करके अपने परिवार की रक्षा और कार्यक्षेत्र में तरक्की की प्रार्थना करें। 

शस्त्र पूजा का महत्व

आदिकाल से ही शस्त्र पूजन की परंपरा चली आ रही है। प्राचीन समय में राजा-महाराजा विशाल शस्त्र पूजन करते रहे हैं। सेना में भी इस दिन शस्त्रों की पूजा की जाती है। पुराने समय में राजा इसी दिन सीमोल्लंघन किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि शस्त्र पूजा करने से व्यक्ति के साहस और शक्ति में वृद्धि होती है। कार्यक्षेत्र में सफलता और समृद्धि मिलती है। वहीं, धार्मिक मान्यता के अनुसार वाहनों आदि को माता काली का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में कहा जाता है कि अपने वाहनों की पूजा करने से दुर्घटना होने का डर नहीं रहता है। 

नवरात्रि पर शस्त्र पूजने की परंपरा क्यों है?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, एक समय ऐसा आया जब महिषासुर नामक पराक्रमी दैत्य ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, तब देवताओं ने शक्ति का आवाहन किया। सबकी अर्जी सुनकर देवी मां प्रकट हुई, तब देवताओं ने अधर्मी महिषासुर का अंत करने के लिए देवी को अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए, जिनसे देवी ने महिषासुर का वध किया। इस युद्ध में देवताओं के शस्त्र बहुत काम आए। इसलिए नवरात्रि के अंतिम दिन आयुध पूजा का विधान है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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