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Basant Panchami 2026: विद्या आरंभ संस्कार के लिए सबसे शुभ है बसंत पंचमी का दिन; तीव्र बुद्धि का होगा बच्चा, ऐसे कराएं अक्षर ज्ञान

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jan 22, 2026 10:28 am IST,  Updated : Jan 22, 2026 10:28 am IST

Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी की तिथि बेहद शुभ होती है। मां सरस्वती को समर्पित यह दिन 'श्री पंचमी' और 'सरस्वती पंचमी' के नाम से भी जाना जाता है। इस मौके पर देश भर में आयोजन होते हैं। मंदिरों को भी खासतौर पर पीले रंग को फूलों से सजाया जाता है। विद्या आरंभ संस्कार के लिए सबसे शुभ दिन क्यों माना जाता है।

Vidyarambh Sanskar on basant panchami- India TV Hindi
बसंत पंचमी पर कराएं बच्चे का विद्या आरंभ संस्कार Image Source : INDIA TV

Basant Panchami 2026: हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। सनातन धर्म में यह बहुत ही शुभ दिन होता है, जो ज्ञान, बुद्धि, कला, संगीत की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। शिक्षा, कला और संगीत से जुड़े लोगों को इस दिन का खास तौर पर इंतजार रहता है। इसके अलावा वे माता-पिता और घर के बुजुर्गों भी इस दिन की विशेष रूप से राह देखते हैं, जिनके बच्चे स्कूल जाने की अवस्था में पहुंच चुके हैं। माघ माह की पंचमी के दिन का एक प्रमुख अनुष्ठान अक्षर-अभ्यास होता है, जिसे विद्या-आरंभ संस्कार भी कहा जाता है। आइए जानते हैं आखिर क्यों यह विद्या आरंभ संस्कार के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। साथ ही जानें बसंत पंचमी 2026 तारीख, पूजा का मुहूर्त क्या है?

बसंत पंचमी तारीख (Basant Panchami 2026 Date)

बसंत पंचमी तिथि शुरू : 23 जनवरी 2026 को मध्यरात्रि 02:28 बजे

पंचमी तिथि समाप्त : 24 जनवरी 2026 को मध्यरात्रि 01:46 बजे

हिंदू पंचांग के अनुसार, 23 जनवरी को पूर्वाह्न काल (सूर्योदय से दोपहर तक) के दौरान पंचमी तिथि है, इसलिए साल 2026 में वसंत पंचमी, शुक्रवार, 23 जनवरी को ही मनाई जाएगी। यह पर्व जाड़े के मौसम के विदाई और बसंत ऋतु के आगमन प्रतीक है। 

बसंत पंचमी 2026 पर बन रहे दो खास योग

साल 2026 की बसंत पंचमी बेहद खास है, क्योंकि इस तिथि पर कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं। पंचांग के अनुसार, सरस्वती पूजा के दिन सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि जैसे दो योग बन रहे हैं। बसंत पंचमी के दिन बनने वाले इन दोनों योगों को विद्या आरंभ, यज्ञोपवीत संस्कार और विवाह के लिए शुभ माना गया है। सरस्वती पूजा के दौरान पुस्तकों और घर में मौजूद वाद्य यंत्रों का पूजन भी करें।

सरस्वती पूजन सरस्वती महामंत्र 

सरस्वती जी की पूजा के लिए अष्टाक्षर मूल मंत्र 'श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा' सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

सरस्वती पूजा का मुहूर्त (Saraswati Puja Shubh Muhurat)

23 जनवरी 2026 को सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक

मध्याह्न मुहूर्त: दोपहर 12:33 बजे

विद्या आरंभ संस्कार के लिए सबसे शुभ दिन

बसंत पंचमी हिंदूओं में किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठानों में से एक विद्या-आरंभ संस्कार करना सबसे शुभ माना जाता है, जिसमें छोटे बच्चों की औपचारिक रूप से शिक्षा की शुरुआत कराई जाती है। कला और संस्कृति से जुड़े लोग भी इस दिन अपने गुरु से आशीर्वाद जरूर लेते हैं। माना जाता है कि इस दिन अक्षर- अभ्यास कराने से मां सरस्वती विद्या का वरदान देती हैं और बच्चा तीव्र बुद्धि का बनता है। 

ऐसे कराएं अक्षर अभ्यास

  • बसंत पंचमी पर शुभ मुहूर्त में पूजा करने से मां सरस्वती की कृपा से आपका बच्चा तीव्र बुद्धि का होगा।
  • पंचमी तिथि पर बच्चे के द्वारा भगवान गणेश को पुष्प अर्पित कराएं। 
  • इसके साथ मां सरस्वती को पीले पुष्प, पीले फल,हल्दी श्रद्धा के साथ अर्पित करें। 
  • बच्चे को अपनी गोद में बिठाकर माता-पिता मां सरस्वती का मंत्र 'ओम ऐं नमः लिखवाएं' और 108 बार इस मंत्र का जाप करें।  

बसंत पंचमी है अबूझ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताएं हैं कि बसंत पंचमी के दिन अबूझ मुहूर्त होता है। यानी कि यह स्वाभाविक रूप से यह तिथि बेहद शुभ होती है। ऐसे दिनों में कोई भी मुहूर्त देखे बिना शुभ कामों की शुरुआत की जा सकती है। यह दिन क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा कोई काम, नए उद्यम आदि शुरू करने के लिए भी उत्तम माना गया है। 

बसंत पंचमी के दिन क्या करें

  1. कहा जाता है कि बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करके वेद शास्त्रों का दान करना चाहिए। इससे मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  2. ऐसे विद्यार्थी जो संगीत की शिक्षा ले रहे हैं, उन्हें बसंत पंचमी के दिन विशेष रूप से संगीत के सात सुरों 'सा, रे, गा, मा, पा, धा, नि' का अभ्यास करना चाहिए।
  3. जो बच्चे अभी मां के दूध पर निर्भर हैं, लेकिन अनाज खाने योग्य हो रहे हैं।  बसंत पंचमी पर उनका'अन्नप्रासन संस्कार' करना बेहतर होता है। इस दिन माताएं खीर बनाकर मां सरस्वती को भोग लगाएं। फिर बच्चे को नए वस्त्र पहनाकर, चौकी पर बिठाएं और चांदी के चम्मच से खीर खिलाएं। मां के अलावा यह परंपरा पिता, दादा, दादी , भाई-बहन भी निभा सकते हैं।

बच्चे की जीभ पर लिखें 'ऊँ' 

सनातन संस्कृति में सबसे पहले चांदी की शलाका या अनार की कलम को शहद में डुबोकर बच्चे की जीभ पर 'ऊँ' या 'ऐं' लिखा जाता है। मान्यता है कि छोटे बच्चे की जीभ पर 'ऊँ' लिखने से वे विद्वान बनते हैं। आज भी कई परिवारों में यह परंपरा निभाई जाती है। अगर आपके घर में छोटा बच्चा है, तो अपने पंडित या ज्योतषातार्य की सलाह से आप भी अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए बसंत पंचमी पर यह परंपरा निभा सकते हैं।  

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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