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देवशयनी एकादशी व्रत अगर टूट जाए तो क्या करना चाहिए? जानें

 Published : Jul 04, 2025 01:00 pm IST,  Updated : Jul 04, 2025 01:00 pm IST

साल में 24 एकादशी तिथि पड़ती है, ऐसे में देवशयनी एकादशी इन सभी में खास मानी जाती है, क्योंकि इस तिथि के बाद भगवान 4 माह के लिए निद्रा में चले जाते हैं।

भगवान विष्णु- India TV Hindi
भगवान विष्णु Image Source : FILE PHOTO

6 जुलाई 2025 को देवशयनी एकादशी व्रत है, यह सभी एकादशी में बेहद खास मानी गई है क्योंकि इस दिन से भगवान विष्णु 4 माह के लिए योग निद्रा में जा रहे हैं। इस दौरान संसार में किसी भी शुभ काम करने पर मनाही है। कारण है कि 4 माह तक भगवान विष्णु के न रहने पर चातुर्मास लगा रहेगा। इस दिन व्रत- पूजन करने का विधान है। मान्यता है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा से व्रत आदि करने वालों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। अगर आप भी इस इस दिन व्रत और पूजन करने वाले हैं तो ये खबर आपके काम की है। हम आपको बताएंगे कि भूलवश अगर कभी कुछ ऐसी चीज खा लें या ऐसा कार्य कर लें जो व्रत के दौरान नहीं करना चाहिए था। जिसे करने से व्रत टूटता है तो ऐसा होने पर आपको क्या करना चाहिए। 

कब है देवशयनी एकादशी व्रत?

पंचांग की मानें तो आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 5 जुलाई की शाम 06.58 बजे लग जाएगी, जो 6 जुलाई की शाम 09.14 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में सभी शुभ तिथियों के लिए उदया तिथि को मान्यता दी जाती है। ऐसे में 06 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी।

अगर व्रत गलती से टूट जाए तो क्या करें?

  • अगर भूलवश आपने कभी एकादशी का व्रत तोड़ दिया है तो घबराएं नहीं। सबसे पहले फिर से सवस्त्र स्नान करें, फिर भगवान विष्णु की मूर्ति का दुध, दही, मधु और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद श्री हरि भगवान विष्णु की षोडशोपचार पूजा करें।
  • अब आपको भगवान विष्णु से क्षमा याचना करनी चाहिए, पूजा स्थल पर जाकर नीचे दिए गए मंत्र का जप आपको करना चाहिए और यह प्रार्थना करनी चाहिए की जो भूल आपने की है उसे नजरअंदाज करके प्रभु व्रत को पूर्ण करने में मदद करें। 

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे॥

  • इसके अलावा व्रत खंडित होने पर भगवान विष्णु के द्वादशाक्षर मन्त्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का यथाशक्ति तुलसी की माला से जाप करें। इसके बाद आप एक माला का हवन भी कर सकते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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