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Amalaki Ekadashi 2025: आमलकी एकादशी के दिन क्यों की जाती हैं आंवले पेड़ की पूजा? जानें व्रत रखने की तिथि और मुहूर्त

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Mar 08, 2025 10:39 pm IST,  Updated : Mar 08, 2025 10:39 pm IST

Amalaki Ekadashi 2025 Date and Muhurat: आमलकी एकादशी के दिन आंवला पेड़ की पूजा का विधान है। इस दिन आंवला पेड़ की पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। तो यहां जानिए आमलकी एकादशी व्रत की तिथि और पूजा मुहूर्त।

आमलकी एकादशी 2025- India TV Hindi
आमलकी एकादशी 2025 Image Source : INDIA TV

Amalaki Ekadashi 2025: फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी बड़ी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के वृक्ष की पूजा का विधान है। दरअसल आंवले का एक नाम आमलकी भी है और इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा के चलते ही इस एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। भगवान विष्णु को आंवले का वृक्ष अत्यंत प्रिय है। आंवले के हर हिस्से में भगवान का वास माना जाता है। इसके मूल, यानि जड़ में श्री विष्णु जी, तने में शिव जी और ऊपर के हिस्से में ब्रह्मा जी का वास माना जाता है। साथ ही इसकी टहनियों में मुनि, देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुद्गण और इसके फलों में सभी प्रजापतियों का निवास माना जाता है। आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। तो आइए जानते हैं कि आमलकी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और पूजा मुहूर्त क्या रहेगा।

आमलकी एकादशी 2025 मुहूर्त

  • आमलकी एकादशी 2025 व्रत तिथि- 10 मार्च 2025
  • फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ- 9 मार्च 2025 को सुबह 7 बजकर 45 पर
  • फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 10 मार्च 2025 को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर
  • आमलकी एकादशी व्रत पारण का समय- 11 मार्च 2025 को सुबह 6 बजकर 50 मिनट से सुबह 8 बजकर 13 मिनट तक
  • पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- सुबह 8 बजकर 13 मिनट पर

आंवले पेड़ का महत्व

कहते हैं आंवले के वृक्ष के स्मरण मात्र से ही गौ दान के समान पुण्य फल मिलता है। इसके स्पर्श से किसी भी कार्य का दो गुणा फल मिलता है, जबकि इसका फल खाने से तीन गुणा पुण्य फल प्राप्त होता है। अतः स्पष्ट है कि आंवले का वृक्ष और उससे जुड़ी हर चीज व्यक्ति को अप्रतिम लाभ पहुंचाने वाली है। 

रंगभरी एकादशी व्रत का महत्व

काशी में फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है।  इस दिन से काशी में होली का पर्वकाल आरंभ हो जाता है। आज के दिन श्री काशी विश्वनाथ श्रृंगार दिवस मनाया जाता है, जिसमें बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर में रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ और पूरे शिव परिवार, यानि माता पार्वती, श्री गणपति भगवान और कार्तिकेय जी का विशेष रूप से साज-श्रृंगार किया जाता है। इसके अलावा भगवान को हल्दी, तेल चढ़ाने की रस्म निभायी जाती है और भगवान के चरणों में अबीर-गुलाल चढ़ाया जाता है। साथ ही शाम के समय भगवान की रजत मूर्ति यानि चांदी की मूर्ति को पालकी में बिठाकर बड़े ही भव्य तरीके से रथयात्रा निकाली जाती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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