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Gopashtami Katha In Hindi: इस दिन से बाल गोपाल ने गाय चराना किया था शुरू, पढ़ें गोपाष्टमी की पावन कथा

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Oct 29, 2025 01:59 pm IST,  Updated : Oct 30, 2025 06:18 am IST

Gopashtami Katha In Hindi: गोपाष्टमी का त्योहार भगवान कृष्ण और गौ माता को समर्पित है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और गायों की पूजा करते हैं। कहते हैं गोपाष्टमी पर गायों की पूजा से व्यक्ति को के सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। चलिए जानते हैं गोपाष्टमी की पावन कथा के बारे में।

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गोपाष्टमी व्रत कथा Image Source : CANVA

Gopashtami Katha In Hindi: गोपाष्टमी सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग गायों और बछड़ों को सजाकर उनकी पूजा करते हैं। कहते हैं इस पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मनुष्य को उसके सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार ये वही खास दिन है जब भगवान कृष्ण ने पहली बार गायों को चराना शुरू किया था। चलिए जानते हैं गोपाष्टमी की पौराणिक कथा के बारे में।

गोपाष्टमी क्यों मनाई जाती है (Gopashtami Kyu Manate Hain)

कहते हैं जब भगवान श्रीकृष्ण ने 7 साल की आयु पूरी की, तब उनके पिता ने उन्हें गायों को चराने का कार्य सौंपा। पहले श्रीकृष्ण भगवान सिर्फ बछड़ों को चराते थे, लेकिन गोपाष्टमी के दिन से यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से उन्होंने गौ माता को चराने का कार्य शुरू किया। कहते हैं तब से ही इस दिन को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाना लगा क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने गौ-पालन का संकल्प लिया था। 

गोपाष्टमी की कथा (Gopashtami Ki Katha)

गोपाष्टमी की कथा के अनुसार जब बाल गोपाल 7 साल के हो गए तो वे अपनी माता से कहने लगे कि मां अब मैं अब बड़ा हो गया हूं इसलिए अब मैं गाय चराने जाऊंगा। यशोदा माता ने कहा कि इस बारे में एक बार अपने पिता से पूछ लो। तब भगवान कृष्ण नंद बाबा के पास गये और कहने लगे कि अब से मैं बछड़े चराने की जगह गाय चराने जाया करूंगा। तब नंद बाबा ने कहा कि ठीक है लेकिन पहले मैं गौ चारण के लिए शुभ मुहूर्त का पता लगा लूं। तब भगवान कृष्ण दौड़ते हुए पंडित जी के पास पहुंचे और उनसे गौ चारण का मुहूर्त देखने के लिए कहा। पंडित जी नंद बाबा के पास पहुंचे और उन्होंने पंचांग देखकर उसी दिन का समय गौ चारण के लिए शुभ बता दिया। तब नंद बाबा ने बाल गोपाल को गौ चारण की आज्ञा दे दी। कहते हैं जिस दिन से बाल कृष्ण ने गौ चारण शुरू किया था उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी। भागवान द्वारा उस दिन गाय चराने का काम शुरू करने के कारण ही इसे गोपाष्टमी के नाम से जाना जाने लगा और हर साल इस दिन को त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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