Hanuman Jayanti Vrat Katha: हर वर्ष चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जयंती का पावन पर्व मनाया जाता है। साल 2026 में हनुमान जयंती 2 अप्रैल को है। इस दिन पवन पुत्र हनुमान जी की पूजा के साथ ही आपको कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। खासकर उन लोगों को जिन्होंने हनुमान जयंती का व्रत लिया है। पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करने से भक्तों को शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आपको बता दें कि हनुमान जयंती से जुड़ी 2 व्रत कथाएं हैं, इनमें से किसी भी कथा का पाठ आप कर सकते हैं।
हनुमान जयंती की व्रत कथा
हनुमान जयंती से जुड़ी व्रत कथा के अनुसार, प्राचीन समय में अंजना नाम की एक अप्सरा थी। अंजना को एक ऋषि के श्राप के कारण वानर रूप में पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा था। श्राप से मुक्त होने के लिए अंजना ने भगवान शिव की तपस्या की। इसी दौरान राज दशरथ पुत्र की प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवा रहे थे। यज्ञ के दौरान जब अग्नि देव ने राजा को खीर दी तो खीर का कुछ अंश लेकर एक चील आकाश में उड़ गई। अंजना माता जब तपस्या में लीन थीं तो उसी दौरान चील उनके ऊपर से गुजरी और वायु देव की कृपा से चील की चोंच से निकलकर खीर माता अंजना की हथेली पर जा गिरी। अंजना माता ने इसे शिव जी का प्रसाद समझ ग्रहण कर लिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस प्रसाद के प्रताप से ही चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जी का जन्म हुथा था। हनुमान जी को शिव भगवान का 11वां रुद्रावतार माना जाता है।
हनुमान जयंती से जुड़ी यह कथा भी है प्रचलित
हनुमान जी के जन्म से जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार, समुद्रमंथन के बाद भगवान शिव ने भगवान विष्णु के मोहिनी रूप को देखने की जिज्ञासा विष्णु जी के सामने रखी। मोहिनी रूप विष्णु भगवान ने तब लिया था जब असुरों और देवताओं के बीच अमृत बांटा जा रहा था। भगवान विष्णु की बात को मानकर विष्णु जी मोहिनी रूप में आ गए। मोहिनी रूप अत्यंत आकर्षक था। मोहिनी रूप को देखकर शिवजी कामातुर हो उठे और उन्होंने वीर्य गिरा दिया। जिसे पवनदेव के द्वारा वानर राजा केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट करवाया गया। इसके बाद अंजना माता ने गर्भ धारण किया और हनुमान जी जन्म हुआ।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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