कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर लोग व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं। वहीं व्रत रखने के बाद जन्माष्टमी के उपवास का पारण करना भी बेहद आवश्यक होता है। व्रत का पूर्ण फल आपको तभी मिलता है जब आप पारण करते हैं। ऐसे में आइए जान लते हैं कि 16 अगस्त को जन्माष्टमी व्रत का पारण कब किया जाएगा और पारण करने की विधि क्या है।
जन्माष्टमी व्रत की पारण विधि
जन्माष्टमी के व्रत का पारण अर्धरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के बाद किया जाता है। पारण से पूर्व कई लोग खीरे से भगवान कृष्ण का जन्म भी इस दिन करवाते हैं। व्रत का पारण करने से पहने आपको विधि-विधान से भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। उनका अभिषेक करने के बाद नए वस्त्र और आभूषण उन्हें पहनाने चाहिए और साथ ही माखन-मिश्री का भोग लगाना चाहिए। इसके बाद फल भी बाल कृष्ण को अर्पित करें। पूजा की समाप्ति के बाद भगवान कृष्ण को अर्पित किए गए प्रसाद को ग्रहण करके ही आपको व्रत का पारण करना चाहिए। इसके लिए आप फल खा सकते हैं या फिर माखन-मिश्री से पारण कर सकते हैं। पारण करने के बाद आपको प्रसाद घर के लोगों में बांटना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारण करने के बाद दान भी आपको करना चाहिए। दान की सामग्री को आप अगले दिन जरूरतमंद लोगों को दे सकते हैं।
जन्माष्टमी पारण का शुभ मुहूर्त
जन्माष्टमी के दिन अर्धरात्रि में 12 बजे कई लोग कृष्ण पूजन के बाद व्रत का पारण कर देते हैं। हालांकि, साल 2025 में पारण करने के लिए सबसे शुभ मुहूर्त 16 तारीख की रात्रि में 12 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप व्रत का पारण कर सकते हैं। आपको बता दें कि जन्माष्टमी व्रत का पारण अष्टमी तिथि की समाप्ति के बाद ही किया जाता है। अष्टमी तिथि 16 अगस्त की रात 9 बजकर 36 मिनट पर समाप्त हो जाएगी इसलिए रात में 12 बजे के बाद पारण करना इस दिन बेहद शुभ माना जा रहा है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
यह भी पढ़ें:
जन्माष्टमी पर कृष्ण भगवान का खीरे से जन्म कैसे कराएं? जानें पूरी प्रक्रिया