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3 जुलाई को रखा जाएगा कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी का व्रत, जानिए पूजा विधि और मुहूर्त

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jul 02, 2026 04:20 pm IST,  Updated : Jul 02, 2026 04:20 pm IST

हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। उन्हें प्रसन्न करने के लिए इस तिथि पर व्रत रख कर विशेष पूजा-आराधना की जाती है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष चतुर्थी को उनके कृष्णपिङ्गल स्वरूप की पूजा होगी। जानिए कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

Sankashti Chaturthi puja vidhi- India TV Hindi
कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि और मुहूर्त Image Source : PINTEREST

हिंदू पंचांग के अनुसार, महीने में दो चतुर्थी तिथियां आती है, एक कृष्ण पक्ष की और दूसरी शुक्ल पक्ष की। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन व्रत, पूजा आदि के माध्यम से बप्पा को प्रसन्न किया जाता है, ताकि उनका आशीर्वाद मिले और हर काम निर्विघ्न रूप से संपन्न हो जाए। आषाढ़ माह की शुरुआत हो चुकी है और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को कृष्णपिङ्गल स्वरूप में बप्पा की आराधना की जाएगी। चलिए जानते हैं कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। 

कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी तिथि और मुहूर्त

कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी 3 जुलाई 2026 को है। मान्यता है कि चतुर्थी का व्रत रखने वालों को अपने काम में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है। पंचांग के अनुसार, इस दिन आषाढ़ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर होगी। तिथि का समापन 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट पर होगा। चूंकि, इस व्रत में गणेश जी के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। शाम की पूजा में चंद्रमा के दर्शन होना जरूरी है, तभी व्रत पूरा माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 3 जुलाई को चतुर्थी तिथि में शाम को चंद्रमा उदय के बाद उनके दर्शन किए जा सकेंगे, जबकि अगले दिन दोपहर तक ही चतुर्थी तिथि रहेगी। ऐसे में व्रत 3 जुलाई को रखा जाएगा। 

  • 3 जुलाई को चंद्रोदय का समय- रात 09 बजकर 53 मिनट पर
  • संकष्टी चतुर्थी के दिन भद्रा- सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 11 बजकर 20 मिनट तक, यह पाताल लोक की भद्रा है, जिसमें पूजा-पाठ की जा सकती है।

कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

  • चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठे स्नान के बाद साफ-सुथरे (पीले या लाल रंग) कपड़े पहनें।
  • इसके बाद पूजा घर की साफ करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • अब लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं, पूजा के समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। 
  • चौकी पर गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 
  • धूप-दीप प्रज्ज्वलित करें और बप्पा को सिंदूर का तिलक लगाएं।
  • गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
  • इसके बाद 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें।

संध्या पूजन

  • शाम के समय पुनः स्नान करें या हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो जाए।
  • सुबह की पूजा विधि को दोहराए।
  • इसके बाद संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
  • अंत में भगवान गणेश की आरती करें। 
  • चंद्रोदय होने पर चांदी या तांबे के लोटे में जल, दूध, चंदन और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें।
  • अब हाथ जोड़कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। 
  • इसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत का पारण करें। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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