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Mahalakshmi Vrat Puja Vidhi: कल से महालक्ष्मी व्रत शुरू, जानें कलश स्थापना मुहूर्त और पूजा-विधि

 Written By: Acharya Indu Prakash Edited By: Naveen Khantwal
 Published : Aug 30, 2025 01:09 pm IST,  Updated : Aug 30, 2025 01:09 pm IST

Mahalakshmi Vrat Puja Vidhi: महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 31 अगस्त से हो रही है। इस दौरान माता की पूजा करने से भक्तों को धन-धान्य की प्राप्ति होती है। आइए जान लेते हैं कि महालक्ष्मी व्रत के पहले दिन आपको कैसे पूजा करनी चाहिए।

Mahalakshmi Vrat 2025- India TV Hindi
महालक्ष्मी व्रत 2025 Image Source : INDIA TV

Mahalakshmi Vrat Puja Vidhi: महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 31 अगस्त से हो रही है। 16 दिनों तक महालक्ष्मी व्रत का पालन किया जाता है। 31 अगस्त से शुरू होकर महालक्ष्मी व्रत 14 सितंबर तक रखे जाएंगे। महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है। जो व्यक्ति महालक्ष्मी के इन सोलह दिनों का व्रत उसके जीवन में धन-धान्य से जुड़ी सभी परेशानियों का अंत होता है। ऐसे लोगों के घर में कभी भी पैसे की कमी नहीं होगी और हमेशा माता का आशीर्वाद बना रहता है। आइए अब जान लेते हैं महालक्ष्मी व्रत की पूजा विधि।

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त

  • कलश स्थापना की के लिये 31 अगस्त को शुभ मुहूर्त– सुबह 5 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। जबकि कलश स्थापना के लिये उचित दिशा उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा है। अतः आप भी इस दिशा में कलश स्थापना कीजिये।  उचित दिशा की अच्छे से साफ-सफाई करके, शुभ मुहूर्त में वहां पर कलश स्थापना कीजिये और स्थापना करने के बाद कलश पर एक लाल कपड़े में कच्चा नारियल लपेटकर रख दीजिये।
  • कलश स्थापना के बाद माता महालक्ष्मी की स्थापना करनी है। देवी मां की स्थापना के लिये एक लकड़ी की चौकी लेकर उस पर सफेद रेशमी कपड़ा बिछाकर, महालक्ष्मी की तस्वीर रखिये। अगर आप तस्वीर की जगह मूर्ति का प्रयोग कर रहे हैं, तो पाटे को आप लाल वस्त्र से सजाइए।
  • यदि संभव हो तो कलश के साइड में एक अखण्ड ज्योति स्थापित कीजिये, जो पूरे सोलह दिनों तक लगातार जलती रहे। अन्यथा रोज़ सुबह-शाम देवी मां के आगे घी का दीपक जलाइए। साथ ही मेवा-मिठाई का नित्य भोग लगाइये।
  • इसके साथ ही 31 अगस्त के दिन घर में जितने सदस्य हैं, उतने लाल रेशमी धागे या कलावे के टुकड़े लेकर उसमें 16 गांठे लगाइए और पूजा के समय घर के सब सदस्य उन्हें अपने दाहिनी हाथ की बाजू या कलाई में बांध लें।
  • पूजा के बाद इसे उतारकर लक्ष्मी जी के चरणों में रख दें। अब इसका पुनः प्रयोग महालक्ष्मी व्रत के अंतिम दिन संध्या पूजा के समय ही होगा। 
  • इसके बाद आपको महालक्ष्मी माता के मंत्रों का जप करना चाहिए महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। पूजा के अंत में महालक्ष्मी माता की आरती आपको अवश्य करनी चाहिए। अंत में लोगों में प्रसाद वितरित करें। इस तरह महालक्ष्मी व्रत के दिन पूजन करके आप जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करते हैं। 

इस मंत्र का जप करने से प्रसन्न होंगी माता महालक्ष्मी

माता महालक्ष्मी को 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र अतिप्रिय है, इस मंत्र का जप आपको सोलह दिनों के दौरान करना चाहिए। लेकिन अगर आपको ये मंत्र बोलने में किसी प्रकार की परेशानी हो रही है तो आप केवल 'श्रीं ह्रीं श्रीं' मंत्र का जाप भी कर सकते हैं, क्योंकि लक्ष्मी का एकाक्षरी मंत्र तो 'श्रीं' ही है। महालक्ष्मी व्रत के दौरान माता के मंत्र का जप करने से आपको मानसिक शांति और आर्थिक उन्नति प्राप्त होती है। 

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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