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3, 5 या 7...राखी बांधते समय कितनी गांठ लगानी चाहिए?

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Aug 05, 2025 01:54 pm IST,  Updated : Aug 05, 2025 02:13 pm IST

Rakhi Bandhte Samay Kitni Ganth Lagani Chahiye: भाई-बहन का प्यारा सा त्योहार रक्षाबंधन आने वाला है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर प्यारी-प्यारी राखियां बांधती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि इस राखी में कितनी गांठ लगाई जाती है?

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3, 5 या 7...राखी बांधते समय कितनी गांठ लगानी चाहिए? Image Source : CANVA

Rakhi Bandhte Samay Kitni Ganth Lagani Chahiye: इस साल राखी यानी रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त 2025, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधती हैं और ईश्वर से उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राखी बांधते समय उसमें कितनी गांठ लगाई जा रही है इसका भी विशेष महत्व होता है। चलिए आपको बताते हैं राखी बांधते समय कितने गांठ बांधनी जरूरी होती है।

राखी बांधते समय कितनी गांठ लगानी चाहिए?

सामान्यतः राखी बांधते समय तीन गांठें बांधने की सलाह दी जाती है। जिसमें पहली गांठ इस संकल्प के साथ बांधी जाती है कि भाई को लंबी उम्र, सुरक्षा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो। दूसरी गांठ भाई-बहन के रिश्ते में अटूट प्रेम, विश्वास और सम्मान की भावना को दर्शाती है तो वहीं तीसरी गांठ भाई को उसके कर्तव्यों की याद दिलाती है कि वह अपने जीवन में हमेशा धर्म, सत्य और मर्यादा के मार्ग पर चलें और हर परिस्थिति में अपनी बहन की रक्षा करे। 

राखी में गांठें बांधते समय बहन शांत रहकर अपने भाई को रक्षा, प्रेम और सद्बुद्धि का आशीर्वाद देती है। कहते हैं इस तरह से राखी बांधने से भाई से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। वहीं कुछ जगहों पर भाइयों को राखी बांधने समय उसमें पांच गांठें लगाई जाती हैं जो पंचतत्व और पांच देवताओं को समर्पित होती हैं। बहनों को गांठ बांधते समय ‘ॐ रक्षं च रक्षाय’ मंत्र का मन ही मन जाप जरूर करना चाहिए। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि राखी में गांठें धीरे-धीरे और पूरी श्रद्धा के साथ लगाएं जिससे ईश्वर की कृपा आपके भाई पर सदैव बनी रहे।

रक्षाबंधन के कुछ विशेष मंत्र

बहनें भाई को राखी बांधते समय नीचे दिए गए रक्षा मंत्रों में से कोई भी एक मंत्र मन ही मन पढ़ सकती हैं। 

  • “ॐ येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
  • “रक्षासूत्रं शुभं दत्तं भुक्तिमुक्तिफलप्रदं। चीरयित्वा पवित्रेण बद्धं चास्तु सुते रणे॥”
  • “चिरंजीवी भव। आयुष्मान् भव। विजयी भव। सर्वसंपदां प्राप्तिर्भवतु।”

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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