Mangala Gauri Vrat Katha: सावन माह शिव जी को बेहद प्रिय है। इसी माह में मां पार्वती ने भगवान शिव को अपनी तपस्या से प्रसन्न कर उन्हें पति रूप में प्राप्त किया था। इस दिन महिलाएं बड़ी श्रद्धा के साथ व्रत रखती हैं और मां गौरी की विधिपूर्वक पूजा करती हैं। मान्यता है कि विवाहित स्त्री अगर यह व्रत करती है तो उसके पति की आयु लंबी हो जाती है और अगर कोई कन्या इस व्रत को करती है तो उसके विवाह के योग बनते हैं। आज यानी 22 जुलाई को इस साल का दूसरा मां मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है।
माना जाता है कि इस तिथि पर जो लोग व्रत-उपवास कर रहे हैं, उन्हें मां मंगला गौरी की व्रत कथा जरूर करनी चाहिए। ऐसे में अपने व्रत और पूजा को सफल बनाने के लिए मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ जरूर करें...
मां मंगला गौरी व्रत कथा
एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में एक सेठ अपनी पत्नी के साथ रहते थे। सेठ के पास धन तो बहुत था, घर में किसी चीज की कमी नहीं थी, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। जिस कारण दोनों पति-पत्नी दुखी रहते थे। संतान न होने की कमी उन्हें हमेशी खलती रहती थी। एक दिन सेठ के घर एक साधु पधारे, सेठ ने उनका बड़े ही आदर से सत्कार किया और फिर उनसे अपनी समस्या बताई। जिस पर साधु ने सेठ की पत्नी को सावन माह में मंगलवार को किए जाने वाले मंगला गौरी व्रत की सलाह दी। साथ ही पूजा विधि के बारे में भी जानकारी दी।
इसके बाद सेठ की पत्नी ने सावन के पहले मंगलवार से ही गौरी मंगला का पूजन और व्रत रखना शुरू कर दिया। अब वह हर मंगलवार विधिपूर्वक व्रत और पूजा-पाठ करने लगी। सेठ की पत्नी की धर्मनिष्ठा से मां पार्वती खुश हुईं और भगवान शिव से संतान प्राप्ति का वरदान देने को कहा। इसके बाद सेठ को स्वप्न में उसी रात माता ने दिव्य दर्शन दिए और कहा कि एक आम के पेड़ के नीचे भगवान गणेश की मूर्ति विराजमान है,तुम उसे पेड़ से आम तोड़कर अपनी पत्नी को खिला देना, इससे तुम्हें संतान की प्राप्ति का सुख मिलेगी।
सेठ अगल दिन सुबह उठा और पत्नी को इसे स्वप्न के बारे बताया। इसके बाद सेठ उस आम के पेड़ को ढूंढने निकल पड़ा। काफी समय तक ढूंढने के बाद, आखिरकार साहूकार को वह आम का पेड़ मिला जहां गणपति महराज की मूर्ति विराजमान थी। सेठ खुश हुआ और फिर आम तोड़ने के लिए पेड़ पर पत्थर मारने लगा। पत्थर फेंकने से एक आम तो टूट कर नीचे गिर गया लेकिन गलती से एक पत्थर भगवान गणेश की प्रतिमा को लग गया। इससे भगवान गणेश क्रोधित हो गए और उन्होंने सेठ को श्राप देते हुए कहा कि- हे स्वर्थी मानव! तूने अपने स्वार्थ के कारण मुझे चोट पहुंचाई है, तुझे मां पार्वती की कृपा से संतान का सुख तो मिलेगा, लेकिन 21 वर्ष की अल्पायु में ही उसकी मृत्यु हो जाएगी।
यह सुनकर सेठ घबरा गया और आम लेकर उल्टे पांव वापस आ गया। उसने बिना कुछ कहे आम पत्नी को खिला दिया और घटना की जानकारी किसी को नहीं दी। कुछ समय बाद भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा से सेठ को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई। अब सेठ और उसकी पत्नी बहुत खुश हो गए, लेकिन जैसे-जैसे समय बितता रहा सेठ को अपने पुत्र को लेकर चिंता होने लगी। देखते ही देखते वह बालक 20 वर्ष का हो गया और व्यापार के कामकाज में पिता का हाथ बंटाने लगा।
एक दिन घर लौटते वक्त सेठ एक तालाब किनारे लगे पेड़ के नीचे अपने पुत्र के साथ भोजन कर रहा था तभी दो कन्याएं कमला और मंगला कपड़े धोने आईं और आपस में बात करने लगीं। कमला ने मंगला से कहा कि मैंने इस सावन में हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने का प्रण लिया है, तुम भी यह व्रत करना। इसस मां प्रसन्न होती है और मनोवांछित वर देती है और अखंड सौभाग्य की भी प्राप्ति होती है। कमला की बात सुनकर मंगला ने भी कहा कि वह भी व्रत करेगी।
दूसरी और सेठ ने दोनों कन्याओं की बात सुना और मन में सोचा कि अगर यह कन्या मंगला गौरी व्रत करती है तो इससे इसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी क्यों न इसे मैं अपनी पुत्रवधु बना लूं। फिर सेठ कन्या के पिता के पास विवाह का प्रस्ताव लेकर गया। पिता मान गया और सेठ के बेटे का विवाह कमला के साथ हो गया। कमला विवाह के बाद भी मां मंगला गौरी का व्रत रखना जारी रखती है। एक दिन उसके भक्ति भाव से प्रसन्न हो गई और उसे स्वप्न में दर्शन दिया और कहा कि मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूं और तुम्हें अखंड सौभाग्य का वरदान देती हूं लेकिन तुम्हारा पति अल्पायु है, इसलिए अगले माह के मंगलवार के दिन एक सांप तुम्हारे पति को डसने आएगा ऐसे में तुम उसके लिए एक प्याले में मीठा दूध रख देना और पास में एक खाली मटका भी रखना। सर्प दूध पीकर मटके में चला जाएगा और फिर तुम मटके को कपड़े से ढक देना।
माता पार्वती की बात सुन कमला ने वही किया, मंगलवार के आते ही एक प्याले में मीठ दूध रखा और पास में एक मटकी भी रखी। सांप जैसे ही आया उसने दूध पिया और फिर मटकी में जाकर बैठ गया। कमला ने जल्दी से मटके पर कपड़ा बांध दिया और उसे जंगल में दूर रख दिया। ऐसा करने से कमला के पति के प्रण बच गए और सेठ का पुत्र श्राप मुक्त हो गया। कमला ने सभी को इसकी जानकारी दी तो सभी हैरान रह गए और फिर सेठ और उसकी पत्नी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
ये भी पढ़ें:
Sawan Bhaum Pradosh Vrat Katha: आज है सावन का पहला प्रदोष व्रत, पढ़ें ये पावन कथा