Sawan Shivratri Rudrabhishek: सावन माह की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाई जाती है। कहते हैं कि इस दिन जो भोले बाबा पर जल अर्पित करते हैं, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। सावन माह विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित है। इस साल सावन शिवरात्रि 23 जुलाई को मनाई जा रही है। पूरे देश में बड़ी ही धूमधाम से यह पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भक्त व्रत, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। शिवरात्रि में रुद्राभिषेक का बड़ा ही महत्व माना जाता है। इसे मुख्य रूप से भक्त अपने सभी दुखों से छुटकारा पाने के लिए करते हैं। रुद्राभिषेक को बड़ा ही चमत्कारी माना गया है।
बता दें कि सावन माह में भक्त अपनी अलग-अलग कामनाओं को लेकर अलग-अलग पूजन सामग्री के साथ शिव जी का रुद्राभिषेक करते हैं। शिव पुराण में रुद्राभिषेक करने के लिए अलग-अलग चीजों से पूजा करने का विधान विस्तार से बताया गया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर किन चीजों से अभिषेक करते हैं और उनसे क्या फल मिलता है...
मुख्य रूप से रुद्राभिषेक जल, दही, दूध, घी, गन्ने का रस, पंचामृत, शहद और गंगाजल जैसी चीजों से किया जाता है।
गंगाजल
भगवान शिव का रुद्राभिषेक गंगाजल से किया जाता है, कावंड़ लाने वाले कावंडिए दूर-दूर से गंगाजल लाकर भगवान का अभिषेक करते हैं। कुछ अन्य लोग गंगाजल से रुद्राभिषेक करते हैं। मान्यता है कि गंगाजल से रुद्राभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है और मनोकामनाओं की भी पूर्ति होती है।
पंचामृत
जल,दूध,दही,घी और शहद से पंचामृत बनाया जाता है। भक्त इस पंचामृत से शिव जी का अभिषेक करते हैं। इससे समृद्धि, धन और प्रचुरता के लिए पंचामृत से अभिषेक किया जाता है।
गन्ने का रस
शिव जी का रुद्राभिषेक गन्ने के रस भी किया जाता है। इससे भक्त को धन-धान्य और संपत्ति की प्राप्ति होती है।
घी
शिवलिंग का रुद्राभिषेक घी से भी किया जाता है। इससे जातक को धन, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
दही
शिव जी का रुद्राभिषेक दही से भी होता है, इससे भक्त को वंश वृद्धि और संतान प्राप्ति होती है।
दूध
सावन शिवरात्रि के दिन शिव जी की रुद्राभिषेक दूध से किए जाने का विधान है, इससे जातक की मनोकामना की पू्र्ति होती है और स्वास्थ्य भी सुधरता है।
जल
सावन में शिव जी को जलाभिषेक किया जाता है। इससे शिवलिंग शुद्ध करने और शांति के लिए जल से अभिषेक किया जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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