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Varuthini Ekadashi 2026 Paran: आज इस शुभ मुहूर्त में खोलें वरुथिनी एकादशी का व्रत, जानें पारण की सही विधि और नियम

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Apr 13, 2026 07:19 pm IST,  Updated : Apr 14, 2026 06:32 am IST

Varuthini Ekadashi 2026 Paran Timing: एकादशी व्रत में पारण का विशेष महत्व होता है। वरुथिनी एकादशी का पारण 14 अप्रैल को किया जाएगा। तो यहां जानिए पारण विधि और नियम के बारे में।

वरुथिनी एकादशी पारण 2026- India TV Hindi
वरुथिनी एकादशी पारण 2026 Image Source : FREEPIK

Varuthini ekadashi 2026 paran muhurat: वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 14 अप्रैल, मंगलवार को किया जाएगा। एकादशी व्रत में पारण का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसका पारण सही और विधि से किया जाए। तो आइए जानते हैं कि वरुथिनी एकादशी का पारण के लिए शुभ समय कब से कब तक रहेगा और व्रत खोलने का नियम क्या है। 

वरुथिनी एकादशी पारण 2026 टाइमिंग

पंचांग के अनुसार,  वैशाख कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि 14 अप्रैल को रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। वरुथिनी एकादशी पारण के लिए शुभ समय 14 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 54 मिनट से सुबह 8 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 6 बजकर 54 मिनट रहेगा। आपको बता दें कि एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है।  एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। 

एकादशी व्रत पारण की सही विधि 

  • एकादशी पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। 
  • इसके बाद विधिपूर्वक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • संभव हो तो व्रत खोलने से पहले किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान-दक्षिणा दें।
  • व्रत खोलते समय तुलसी दल (पत्ता) और जल का प्रयोग करें
  • एकादशी पारण के दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। 
  • पारण के दिन भी लहसुन, प्याज से बनी चीजों से दूरी बनाकर रखें।
  • पारण हमेशा द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लेना चाहिए। 
  • द्वादशी तिथि के अंदर पारण न करना पाप करने के समान होता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इंडिया टीवी इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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