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हर मंगलवार करें ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ, हनुमान जी कृपा से मिलेगी कर्ज और आर्थिक तंगी से निजात!

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jun 09, 2026 10:50 am IST,  Updated : Jun 09, 2026 10:50 am IST

Rin Mochan Mangal Stotra: मंगलवार का दिन बजरंगबली को समर्पित हैं। हनुमान जी की पूजा से सभी कष्टों का नाश होता है। वहीं, जो लोग आर्थिक समस्याओं या कर्ज के बोझ से परेशान हैं, उन्हें इस दिन ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए। यहां पढ़िए संपूर्ण स्तोत्र..

Manglwar ke upay- India TV Hindi
ऋणमोचक मंगल स्तोत्र है कर्ज मुक्ति का उपाय Image Source : INDIA TV

Rin Mochan Mangal Stotra: सनातन धर्म में मंगलवार का दिन राम जी के परम भक्त हनुमान जी और ग्रहों के सेनापति मंगल को समर्पित है। मंगलवार के दिन बजरंगबली की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। मान्यता है कि हनुमान जी की सच्चे मन से भक्ति करने वाले जातकों को जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने का साहस मिलता है और अनहोनी टल जाती है। साथ ही मंगल दोष का भी निवारण होता है। मंगलवार के दिन बजरंग बाण, हनुमान चालीसा आदि का विशेष रूप से पाठ किया जाता है। इसके एक ऐसा चमत्कारी पाठ है, जो तमाम तरह की आर्थिक दिक्कतों मुक्ति दिलाने में सहायक माना जाता है। मान्यता है कि हर मंगलवार को इस स्तोत्र का पाठ करने से भारी से भारी कर्ज से मुक्ति मिल सकती है। यहां पढ़िए चमत्कारी ऋणमोचक मंगल स्तोत्र के संपूर्ण लिरिक्स। 

ऋणमोचन मंगल स्तोत्र (Rin Mochan Mangal Stotra)

मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः।

स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः।।

लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः।
धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः।।

अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः।
व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः।।

एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत्।
ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात्।।

धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम्।।

स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः।
न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित्।।

अङ्गारक महाभाग भगवन्भक्तवत्सल।
त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय।।

ऋणरोगादिदारिद्रयं ये चान्ये ह्यपमृत्यवः।
भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा।।

अतिवक्त्र दुरारार्ध्य भोगमुक्त जितात्मनः।
तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुश्टो हरसि तत्ख्शणात्।।

विरिंचिशक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा।
तेन त्वं सर्वसत्त्वेन ग्रहराजो महाबलः।।

पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः।
ऋणदारिद्रयदुःखेन शत्रूणां च भयात्ततः।।

एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः स्तौति च धरासुतम्।
महतिं श्रियमाप्नोति ह्यपरो धनदो युवा।।

इति श्री ऋणमोचक मङ्गलस्तोत्रम् सम्पूर्णम्।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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