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July Panchak 2026: जुलाई में दो बार लगेगा पंचक का साया, जानिए कब-कब आएगी ये अशुभ अवधि और कौन से काम रहेंगे वर्जित

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jun 24, 2026 09:58 am IST,  Updated : Jun 24, 2026 10:33 am IST

July Panchak 2026: ज्योतिष शास्त्र में पंचक को अशुभ अवधि माना गया है, जिसमें कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है। जुलाई 2026 में यह अवधि दो बार पड़ेगी। इस दौरान घर निर्माण, लकड़ी एकत्र करना और दक्षिण दिशा की यात्रा जैसे कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

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जुलाई 2026 में दो बार मंडराएगा पंचक का साया Image Source : INDIA TV

July Panchak 2026 Dates: सनातन परंपरा में हर काम पंचांग देखकर किया जाता है। धर्म और वैदिक ज्योतिष शास्त्र में समय को शुभ और अशुभ कालखंडों में बांटा गया है। इन्हीं में से एक है पंचक, जिसे विशेष ज्योतिषीय स्थिति में अशुभ माना जाता है। इस दौरान कुछ कार्यों वर्जित होते हैं। जुलाई 2026 में पंचक का साया दो बार पड़ेगा। चलिए जानते हैं कब-कब पड़ेगी यह अशुभ अवधि। 

पंचक की स्थिति (Kyu Aur Kab Lagta Hai Panchak)

ज्योतिष के अनुसार, पंचक का साया तब मंडराता है, जब हर महीने चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में प्रवेश करते हैं। यह अवधि 5 दिनों की होती है, जिसमें धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र शामिल होते हैं। यह समय बेहद संवेदनशील समय माना जाता है। इस दौरान कई प्रकार के कार्यों को करने की मनाही होती है।

जुलाई 2026 में कब लगेगा पंचक (Panchak July 2026)

मान्यता है कि पंचक के दौरान किए गए कुछ कार्यों में बाधाएं आने की संभावना बढ़ जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जुलाई 2026 में दो बार आएगी यह अशुभ अवधि

  • पहला पंचक:  03 जुलाई को देर रात 12:48 बजे शुरू होकर 08 जुलाई शाम 4:00 बजे तक रहेगा।
  • दूसरा पंचक:  31 जुलाई सुबह 06:38 बजे शुरू होकर 04 अगस्त तक प्रभावी रहेगा।

क्या न करें पंचक में (Panchak Mein Varjit Kaam)

  • इस अवधि में लकड़ी तोड़ना, तिनके, स्तंभ रोपण, ताम्बा, पीतल, घास और ईंधन इकट्ठा करने से बचना चाहिए।
  • दुकान, मकान की छत डालना या निर्माण कार्य शुरू करना अशुभ माना जाता है।
  • नया पलंग, चारपाई और चटाई आदि बुनना, बेड या चारपाई खरीदने की भी मनाही है।
  • पंचक में किसी की मृत्यु होने पर दाह संस्कार के विशेष नियमों का पालन जरूरी है। क्योंकि परिवार में पांच मृत्यु का भय बना रहता है। इस दोष से छुटकारा पाने के लिए दाह संस्कार के दौरान आटे के पांच पुतले बनाकर साथ में जलाए जाते हैं, जिसे पंचक शांति विधान कहते हैं। 
  • दक्षिण दिशा की यात्रा से भी परहेज करें, यह यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना है। बहुत जरूरी हो, तो कुछ उपाय करके ही घर से निकलना चाहिए।

क्या कर सकते हैं इस दौरान 

  • शुभ नक्षत्र उपलब्ध हो तो सगाई या विवाह जैसे कार्य किए जा सकते हैं। मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, वधू प्रवेश, उपनयन आदि शुभ कार्यों में पंचक निषेध के बारे में कहीं भी नहीं बताया है और जरूरी होने पर इनका उपाय भी संभव है।
  • इस समय सरकारी काम और कानूनी कार्य भी किए जा सकते हैं।
  • रक्षाबंधन और भाई दूज जैसे त्योहार इस अवधि में सामान्य रूप से मनाए जाते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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