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Somvati Amavasya Katha 2026: आज है सोमवती अमावस्या, अखंड सौभाग्य और पितृदोष से मुक्ति के लिए जरूर पढ़ें यह पौराणिक कथा

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Jun 15, 2026 07:08 am IST,  Updated : Jun 15, 2026 07:08 am IST

Somvati Amavasya Katha 2026: सोमवती अमावस्या का पावन पर्व इस साल 15 जून 2026 को मनाया जा रहा है। अगर इस दिन आपके व्रत रखा है तो इस पावन कथा को पढ़ना बिल्कुल भी न भूलें। मान्यताओं अनुसार इस कथा को पढ़ने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के साथ-साथ पितृदोष से भी मुक्ति मिलती है।

somvati amavasya vrat katha- India TV Hindi
सोमवती अमावस्या व्रत कथा Image Source : INDIA TV

Somvati Amavasya Katha 2026: सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं जो इस साल 15 जून को मनाई जा रही है। सनातन धर्म में इस अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस दिन व्रत पूजन करने से जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है और ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस अमावस्या का तब ओर भी ज्यादा महत्व बढ़ जाता है जब ये अधिकमास में पड़ रही हो और 15 जून को पड़ने वाले अमावस्या अधिकमास में ही पड़ रही है। चलिए जानते हैं सोमवती अमावस्या की पावन कथा के बारे में विस्तार से यहां।

सोमवती अमावस्या व्रत कथा (Somvati Amavasya Katha)

सोमवती अमावस्या की कथा के अनुसार एक गरीब ब्राह्मण परिवार था, उस परिवार में पति-पत्नी और उसकी एक पुत्री रहती थी। पुत्री सुंदर, संस्कारवान और गुणवान थी, लेकिन गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था। एक दिन उस ब्राह्मण के घर एक साधु महाराज पधारें थे। साधु उस कन्या के सेवाभाव से बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने कन्या को लंबी आयु का आशीर्वाद देते हुए कहा कि इस कन्या के हाथ में विवाह योग्य रेखा नहीं है।

ये सुन ब्राह्मण दम्पति परेशान हो गए और उन्होंने साधु महाराज से इसका उपाय पूछा। साधु महाराज ने अपनी अंतर्दृष्टि में ध्यान करके बताया कि यहां से कुछ ही दूरी पर एक गांव है, जहां सोना नाम की पति परायण धोबिन महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है। यदि यह कन्या उस धोबिन की सेवा करे और बदले में वो महिला इसकी शादी में अपनी मांग का सिंदूर इसे लगा दें और इसके बाद इस कन्या का विवाह हो जाए, तो इसके जीवन से वैधव्य योग अवश्य मिट जाएगा। यह बात सुनकर ब्राह्मणी ने अपनी बेटी को धोबिन की सेवा करने के लिए कहा। अगले दिन से ही कन्या प्रात: काल उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर साफ-सफाई समेत अन्य कार्य करने लगी। 

लेकिन ये कार्य वे चुपचाप बिना किसी को बताए करती रही। वो रोजाना सुबह-सुबह धोबिन के घर जाती और उसके घर का सारा काम निपटाकर उनके जगने से पहले ही अपने घर वापस आ जाती। एक दिन सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि तुम कब सुबह उठकर सारे काम कर लेती हो मुझे पता भी नहीं चलता। बहू ने कहा: मां मैं तो सोच रही थी कि आप खुद ही ये सारे काम रोजाना कर रही हैं क्योंकि मैं तो देर से उठती हूं। यह जानकर सास-बहू हैरानी में पड़ गईं कि आखिर कौन उनके घर के सारे काम कर रहा है।

इसके बाद सास-बहू अब अपने घर की निगरानी में लग गईं। कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि उनके घर में एक कन्या मुंह ढके अंधेरे में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है। जब कन्या जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी और पूछने लगी कि आप कौन है और ऐसे छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं? तब कन्या ने धोबिन को सारी बात बताई। ये सुनकर सोना धोबिन उसे अपनी मांग का सिंदूर देने के लिए तैयार हो गई। उस समय सोना धोबिन का पति थोड़ा अस्वस्थ था लेकिन उसके बाद भी वो उस कन्या की मदद करने के लिए गई।

सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर कन्या की मांग में लगाया उधर सोना धोबिन का पति मर गया। धोबिन को इस बात का पता भी चल गया। उस दिन धोबिन अपने घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर कि रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा जिसे भंवरी देकर और उसकी परिक्रमा करने के बाद ही वो जल ग्रहण करेगी। उस दिन सोमवती अमावस्या थी। उस कन्या के घर मिले पूए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकड़ों से 108 बार भंवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और फिर जल ग्रहण किया। विधि विधान से सोमवती अमावस्या का व्रत रखने से उसका पति फिर से जीवित हो उठा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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