डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3765 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसे निकाले थे।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि हाल की खरीदारी को वैश्विक वृहद चिंताओं में कमी, खासकर अमेरिका के नरम महंगाई आंकड़ों से समर्थन मिला है। इससे, एफपीआई की भारत समेत उभरते बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता बेहतर हुई है।
FPIs ने सितंबर में 23,885 करोड़ रुपये, अगस्त में 34,990 करोड़ रुपये और जुलाई में 17,700 करोड़ रुपये के इक्विटी बेचकर पैसे निकाले थे।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सितंबर में 23,885 करोड़ रुपये, अगस्त में 34,990 करोड़ रुपये और जुलाई में 17,700 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसे निकाले गए थे।
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 14,610 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
वी. के. विजय कुमार ने कहा कि नवंबर में अब तक सभी दिन जारी रही बिकवाली की नई प्रवृत्ति ने इस साल अन्य प्रमुख बाजारों की तुलना में भारत के खराब प्रदर्शन में योगदान दिया है।
एफपीआई ने सितंबर में 23,885 करोड़ रुपये, अगस्त में 34,990 करोड़ रुपये और जुलाई में 17,700 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी।
इस उलटफेर के पीछे कई प्रमुख कारक बताए जा रहे हैं। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के हिमांशु श्रीवास्तव के अनुसार, उभरते बाजारों में भारत का वृहद आधार अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है।
कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा बिकवाली के बावजूद स्थितियां धीरे-धीरे भारत के पक्ष में हो सकती हैं।
एफपीआई को लेकर आगे की संभावनाओं पर, मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत और अमेरिका से आने वाले वृहद आर्थिक आंकड़े और टैरिफ को लेकर जारी बातचीत, अगले हफ्ते एफपीआई प्रवाह को प्रभावित करेगी।
वी. के. विजय कुमार ने कहा कि लगातार बड़े पैमाने पर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से एफपीआई उच्च मूल्यांकन पर पैसा भुनाने और चीन, हांगकांग और दक्षिण कोरिया जैसे सस्ते बाजारों में पैसा लगाने में सक्षम हो रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये बिकवाली वैश्विक और घरेलू कारकों, दोनों कारणों से हुई है। अगस्त की बिकवाली फरवरी के बाद सबसे तेज थी।
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने इस महीने (14 अगस्त तक) शेयरों से 20,975 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है। इससे पहले जुलाई में उन्होंने स्थानीय शेयर बाजार से 17,741 करोड़ रुपये निकाले थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए हेवी टैरिफ से शेयर बाजार प्रभावित हुआ है। इससे विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे हैं।
FPI ने इससे पहले जून में 14,590 करोड़ रुपये, मई में 19,860 करोड़ रुपये और अप्रैल में 4,223 करोड़ का निवेश किया था।
मई महीने में निवेश करने के बाद जून के पहले सप्ताह में विदेशी निवेशक बिकवाल हो गए हैं।
एफपीआई की भारतीय बाजार में खरीद जारी रहने की संभावना है। ऐसे में बड़ी कंपनियों के शेयरों में मजबूती रहेगी। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने (16 मई तक) अबतक शेयरों में 18,620 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि इस नए जोश को अनुकूल वैश्विक संकेतों और मजबूत घरेलू बुनियाद ने सहारा दिया है, जिससे उनका भरोसा बढ़ा है।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट के संयुक्त निदेशक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि वैश्विक व्यापार तनाव कम होने से निवेशकों की धारणा में और सुधार आया।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार के अनुसार, डॉलर इंडेक्स में गिरावट और डॉलर की कमजोरी के चलते एफपीआई अमेरिका से हटकर भारत जैसे उभरते बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।
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