मुंबई: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की गवर्निग काउंसिल ने रविवार को बैठक कर लोढ़ा समिति के आदेश का पालन करने का निर्णय लिया और आदेश के अध्ययन के लिए एक वर्किं ग ग्रुप के गठन का भी निर्णय लिया। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित न्यायमूर्ति आर. एम. लोढ़ा समिति ने आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग एवं सट्टेबाजी मामले में 14 जुलाई को दोषियों गुरुनाथ मयप्पन और राज कुंद्रा पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया, जबकि उनकी फ्रेंचाइजियों चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स को दो वर्ष के लिए निलंबित कर दिया।
बीसीसीआई के सचिव अनुराग ठाकुर ने एक वक्तव्य जारी कर कहा, "बीसीसीआई लोढ़ा समिति के फैसले का सम्मान करती है तथा उनके आदेशों का पूर्णत: पालन भी करेगी। सदस्यों का मानना है कि इस आदेश के तत्काल प्रभाव को तथा बीसीसीआई के लिए इसके व्यापक निहितार्थ को समझने की जरूरत है, ताकि देश में क्रिकेट की सर्वोच्चता को बरकरार रखा जा सके।"
उल्लेखनीय है कि मयप्पन बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एवं अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मौजूदा चेयरमैन एन. श्रीनिवासन के दामाद हैं। वहीं कुंद्रा भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक और मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति हैं। कुंद्रा के पास रॉयल्स टीम के 11.74 फीसदी शेयर थे, जिसे उन्होंने इसी वर्ष मार्च में बेच दिए।
अनुराग ने कहा, "इसलिए आईपीएल की गवर्निग काउंसिल ने चेयरमैन राजीव शुक्ला को एक वर्किं ग ग्रुप के गठन का अधिकार प्रदान किया। यह वर्किं ग ग्रुप हमारे सभी प्रमुख सलाहकारों की मदद से इस आदेश का अध्ययन करेगी तथा अपनाए जा सकने योग्य सभी उपायों का पता लगाएगी। इसका उद्देश्य सभी साझेदारों के हितों की रक्षा करना होगा।"
उन्होंने आगे कहा, "वर्किं ग ग्रुप छह सप्ताह में अपना कार्य पूरा करेगा और गवर्निग काउंसिल को अपनी सिफारिशें सौंपेगा। इन सिफारिशों को बीसीसीआई की वर्किं ग कमिटी से साझा किया जाएगा, ताकि उस पर आगे की कार्रवाई की जा सके।"
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आईपीएल-6 में स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के आरोपों की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति मुकुल मुद्गल समिति ने मयप्पन और कुंद्रा को सट्टेबाजी का दोषी पाया था।
इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मयप्पन और कुंद्रा तथा उनकी फ्रेंचाइजियों के खिलाफ सजा तय करने के लिए 22 जनवरी को देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति लोढ़ा की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति अशोक भान (सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति आर. रवींद्रन (सेवानिवृत्त) वाली समिति गठित की थी।