ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ओपनर मैथ्यू हैडन का मानना है कि मौजूदा टेस्ट सिरीज़ में "दोयम दर्जे की पिच" से भारत को कोई फ़ायदा नहीं पहुच रहा है। हैडन ने 2001 में भारत दौरे पर तीन टेस्ट मैच में 109.8 की औसत से 549 रन बनाए थे। इस सिरीज़ में कमेंटेटर की भूमिका निबा रहे हैडन ने कहा कि उन्हें समझ नही आता कि BCCI ने पुणे और बेंगलुरु में स्पिनरों की मदद वाली पिच क्यों बनवाई जहां मैच तीन और चार दिन में समाप्त हो गए।
हैडन ने एक प्रमुख अंग्रेज़ी दैनिक के सात बातचीत में कहा कि "टेस्ट मैच दोयम दर्जे की पिचों पर खेले गए। ये हैरानी भरा है क्योंकि इंडिया अच्छे विकेट पर खेल सकती है जो ख़ुद ब ख़ुद टूटकर टर्न लेने लगते हैं। नैथन लॉयन ने टेस्ट मैच में पहली पारी में आठ विकेट लिए जो ख़ुद ये बात दर्शाता है।"
लॉयन ने बेंगलुरु में पहेल ही दिन असमतल उछाल और धूमने वाले विकेट पर पहली पारी में 50 रन देकर 8 विकेट लिए थे जो उनके करिअर का सर्वक्षेष्ठ प्रदर्शन है।
मैच ख़त्म होने के बाद कोच डैरन लेहमैन ने कहा था, "दिलचस्प पिच...साढ़े चार घंटे के अंदर 16 विकेट गिरे। ऐसे ही विकेट आगे मिलेंगे। जो है सो है, इससे आपको ही निबटना है।"
पुणे में पहले मैच में स्टीव ओ' कीफ़ ने फिरकी गेंदबाज़ी से इंडियन बल्लेबाज़ों को घूमा दिया था और मैच ऑस्ट्रेलिया ने जीता था। मैच रैफरी ने बाद में अपनी रिपेर्ट में पिच को ख़राब बताया था जिसे BCCI ने चुनैती दी है।
रांची में भी ऐसा ही विकेट मिलने की उम्मीद है जहां गुरुवार से तीसरा टेस्ट मैच शुरु हो रहा है। ICC रैंकिंग में टॉप बॉलर अश्विन और जडेजा चाहेंगे कि पिच घुमावदार रहे ताकि वे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों का जीना दूभर कर सकें।
हैडन ने कहा, "मैंने कुछ महान बारतीय स्पिनरों को खेला है और ये अटैक भी उतना ही अच्छा है। ये स्पिनर विश्वस्तरीय हैं। भारतीय कंडीशन्स में स्वीप शॉट खेलना आना चाहिये लेकिन मैंने घरेलू क्रिकेट में दस साल तक ये शॉट खेला था तब जाकर इस पर महारथ हासिल की थी। इसे सीखने में समय लगता है और अगर आपको ये शॉट लगाना नहीं आता तो इसे नहीं खेलना चाहिये।"