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बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत के खिलाफ इस राज्य की सरकार ने उठाए कदम, वर्कफोर्स बनाने का किया फैसला

 Published : Feb 26, 2026 07:11 am IST,  Updated : Feb 26, 2026 07:11 am IST

बच्चों में 'डिजिटल लत' और इसके हो रहे निगेटिव असर के अध्ययन के लिए इस राज्य की सरकार वर्कफोर्स गठित करेगी।

Digital Addiction- India TV Hindi
डिजिटल एडिक्शन Image Source : PEXALS

Workforce Against Digital Addiction in Maharashtra: भारत में युवा पीढ़ी डिजिटल लत की गिरफ्त में आती जा रही है और अलग-अलग सरकारों ने इसके खिलाफ कदम उठाने शुरू कर दिए कर दिए हैं। बच्चों में 'डिजिटल लत' और इसके बुरे असर को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, महाराष्ट्र सरकार ने इस मुद्दे का अध्ययन करने और उपाय सुझाने के लिए एक एक्सपर्ट वर्कफोर्स गठित करने का फैसला लिया है। महाराष्ट्र के आईटी मंत्री आशीष शेलार ने विधान परिषद में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस वर्कफोर्स में राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के सदस्य शामिल होंगे और यह अपनी रिपोर्ट विधानमंडल के अगले सत्र से पहले पेश करेगा। 

हाल ही में बिहार सरकार ने भी बच्चों के सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को लेकर पॉलिसी बनाने का ऐलान किया है। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने इसके लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस (NIMHANS), बेंगलुरू से एक डिटेल रिपोर्ट मंगाई है।

महाराष्ट्र में मंत्री ने क्या जानकारी दी

महाराष्ट्र के आईटी मंत्री आशीष शेलार ने एक अध्ययन का हवाला भी दिया जिसमें शहरी और ग्रामीण महाराष्ट्र में बच्चों के बीच गेमिंग की लत में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत दिया गया था। वह विधान परिषद सदस्य निरंजन दावखरे और संजय केनेकर द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे, जिसमें बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत और इसके प्रतिकूल प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था।

गेमिंग ऐप और सोशल मीडिया के यूज पर उठे सवाल

इस चर्चा में अलग-अलग दलों के सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया, जहां बच्चों के लिए गेमिंग ऐप और सोशल मीडिया के उपयोग पर आयु प्रतिबंधों के संबंध में प्रश्न उठाए गए, और यह भी मुद्दा उठा कि क्या नाबालिगों को टार्गेट करने वाले डिजिटल विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। शेलार ने अपने लिखित बयान में कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव वीरेंद्र सिंह को दो फरवरी को इस मामले की पड़ताल के लिए एक वर्कफोर्स गठित करने के निर्देश जारी किए गए थे। 

उन्होंने बताया कि राज्य में 18 वर्ष से कम उम्र के लगभग चार करोड़ बच्चे हैं, जिनमें लगभग तीन करोड़ बच्चे 15 वर्ष से कम आयु के हैं इसलिए, उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य गंभीर चिंता का विषय है। मंत्री ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय विशेषज्ञ कार्यबल में शिक्षाविद, मनोचिकित्सक, बाल परामर्शदाता, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, डॉक्टर, कानूनी विशेषज्ञ और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

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