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Meta में छिड़ा 'महाक्लेश'! बॉस पर भड़के एआई चीफ Alexender Wang, जुकरबर्ग ने 1.26 लाख करोड़ रुपये का किया था निवेश

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Jan 16, 2026 06:52 pm IST,  Updated : Jan 16, 2026 06:55 pm IST

मेटा के को-फाउंडर और एआई चीफ के बीच नई जंग छिड़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा में इस समय परिवर्तन का दौर चल रहा है। कंपनी के स्ट्रक्चर में बदलाव किया है, जिसकी वजह से कंपनी के को-फाउंडर और नए एआई चीफ के बीच अनबन की खबरें सामने आई है।

Meta AI, Mark Zuckerberg- India TV Hindi
मार्क जुकरबर्ग Image Source : PTI

मेटा में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। गूगल और ओपनएआई के बढ़ते दबदबे के बीच मेटा एआई की चमक धीमी पड़ रही है। इन दिनों अमेरिकी सिलिकॉन वैली की गलियारों से नई खबरें सामने आ रही है। मेटा में इन दिनों 'महाक्लेश' छिड़ा हुआ है। कंपनी के को-फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और मेटा-एआई के चीफ Alexender Wang के बीच अनबन हो गई है। मार्क जुकरबर्ग ने पिछले साल ही 28 साल के वांग को मेटा एआई का चीफ नियुक्त किया था और वांग के स्टार्ट-अप Scale AI में लगभग 14 अरब डॉलर यानी 1.26 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था।

क्या है तनाव की वजह?

मार्क जुकरबर्ग ने पिछले साल बड़ा दांव खेलते हुए Alexender Wang को एआई चीफ नियुक्त किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा एआई के चीफ Alexender Wang इस समय मार्क जुकरबर्ग के काम करने के तरीकों से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि यह तरीका उनके काम को सफोकेट कर रहा है यानी उन्हें घुटन महसूस हो रही है। दरअसल, वांग मार्क जुकरबर्ग की दखलअंदाजी से परेशान लग रहे हैं।

अंदरूनी कर्मचारियों की मानें तो वांग अभी एक्सपीरियंस और उम्र दोनों के लिहाज से मार्क जुकरबर्ग के काफी जूनियर हैं। हालांकि, वांग ने इतनी कम उर्म में ही Scale AI जैसे स्टार्ट-अप को खड़ा किया है, जो इस समय दुनिया की सबसे बड़ी डेटा लेबलिंग कंपनियों में से एक है। यही कारण है कि मार्क जुकरबर्ग ने वांग को अपनी नई सुपरइंटेलिजेंस लैब्स का प्रमुख बनाया था। मेटा इस समय एआई की रेस में Google, OpenAI, Microsoft जैसी दिग्गज कंपनियों से भिड़ रही है। वांग को इसके लिए ऑपरेशनल फ्रीडम नहीं मिल पा रहा है।

मेटा के स्ट्रक्चर में हुआ बदलाव

मार्क जुकरबर्ग ने हाल ही में मेटा की नई रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर सिस्टम को लागू किया है। इसके बाद कई टीम की सीधी रिपोर्टिंग लाइन बदली जा चुकी है। इसकी वजह से मार्क जुकरबर्ग की तरफ से वांग को ऑपरेशनल फ्रीडम नहीं मिल पा रही है। जकरबर्ग खुद ही मेटा-एआई प्रोडक्ट को माइक्रो मैनेज कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यह दो अलग-अलग सोच की टकराव लग रही है। इसे ईगो क्लैश नहीं कहा जा सकता है। मार्क जुकरबर्ग प्रोडक्ट फर्स्ट और फास्ट शिपिंग मॉडल वाली सोच रखते हैं। वहीं, वांग पूरी तरह से रिसर्च फर्स्ट और फाउंडेशन मॉडल पर फोकस करने की सोच पर काम करते हैं।

कई लोग छोड़ चुके कंपनी

पिछले दिनों कई खबरें सामने आई हैं, जिनमें कहा गया है कि मेटा एआई से कुछ टॉप टैलेंट निकल चुके हैं। कई सीनियर इंजीनियर्स और रिसर्चर्स अपनी रोल्स और प्रॉयरिटी को लेकर असमंजस में है। मार्क जुकरबर्ग अपने मेटावर्स प्रोजेक्ट में अरबों डॉलर लगा चुके हैं। ऐसे में टॉप मैनेजमेंट और को-फाउंडर के बीच टकराव की वजह से कंपनी के भविष्य पर खतरा मंडरा सकता है।

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