चीन में अगले महीने होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के प्रमुख कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के भी हिस्सा लेने की संभावना है। यह मुख्य प्रोग्राम 31 अगस्त से 1 सितंबर तक होगा।
चीन में हो रही एससीओ की बैठक में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार शामिल हुए। भारत की तरफ से इस बैठक में एस जयशंकर शामिल हुए हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने इस बैठक में पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र किया है।
जयशंकर की चीन यात्रा इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि यह दोनों देशों के बीच संचार के रास्ते खोलने और कूटनीतिक प्रयासों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक कदम हो सकती है।
एसीओ की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संयुक्त बयान पर साइन नहीं किया था। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने अपना पक्ष साफ कर दिया। इस मामले पर अब विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान आया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीनी समकक्ष से मुलाकात में स्पष्ट सीमा रेखा, सैनिकों की वापसी और भरोसा बहाली की मांग की। उन्होंने सीमा विवाद के स्थायी समाधान और सांस्कृतिक सहयोग को भी अहम बताया।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डॉन जून के बीच बैठक हुई है। इस दौरान दोनों के बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर बात हुई है। राजनाथ सिंह एससीओ समिट में भाग लेने के लिए चीन में हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को चीन में SCO बैठक में संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि SCO समिट में आतंकवाद पर भारत के स्टैंड से एक देश को असहमति थी। हमने अपने स्टेटमेंट में आतंकवाद पर अपना पक्ष रखा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को स्पष्ट कर दिया है। रक्षा मंत्री ने SCO बैठक में संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन की धरती से पूरी दुनिया को एक बड़ा संदेश दिया है। एससीओ में रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान उन्होंने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया और कहा कि आतंकवाद के केंद्र अब सुरक्षित नहीं हैं और हम उन्हें निशाना बनाने में संकोच नहीं करेंगे
पाकिस्तान ने कहा कि जयशंकर की इस्लामाबाद यात्रा से दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघली है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने क्रिकेट संबंध सुधारने पर चर्चा की।
कश्मीर से 370 हटाना और फिर लद्दाख को अलग प्रदेश बनाने का फैसला कितना सही था, इस बात का अंदाजा आपको एससीओ शिखर वार्ता में चीन और पाकिस्तान को रोने से हो जाएगा। जाहिर है कि चीन- पाकिस्तान ने माना है कि भारत के इस फैसले से उनकी संप्रभुता कमजोर हुई है।
पाकिस्तान ने एससीओ शिखर सम्मेलन में चीन के बीआरआई यानि ओबीओआर का समर्थन किया है। मगर भारत ने इसे पीओके क्षेत्र में बनने के कारण क्षेत्रीय अखंडता और प्रभुता के खिलाफ बताते हुए खारिज कर दिया है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर एससीओ शिखर वार्ता में शामिल होने के बाद आज इस्लामाबाद से भारत के लिए रवाना हो गए। उन्होंने पाकिस्तान में आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद का मुद्दा उठाया। साथ ही पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों को आत्मावलोकन करने की सलाह भी दी।
पाकिस्तान को उसी की धरती पर विदेश मंत्री जयशंकर ने पस्त कर दिया है। आतंकवाद, उग्रवाद और बुरी नीयत के मसले पर उन्होंने पाकिस्तान के साथ चीन को भी निशाने पर लिया है। साथ ही दोनों देशों का नाम लिए बिना उनको आत्मावलोकन की सलाह भी दी है।
इस्लामाबाद में एससीओ शिखर सम्मेलन का आज समापन हो गया। इस दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने एससीओ के अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। साथ ही भारत की ओर से 8 प्रमुख बिंदु प्रस्तुत किए गए।
एससीओ समिट में एस जयशंकर ने एससीओ परिषद के शासनाध्यक्षों की 23वीं बैठक को संबोधित किया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण से, हमारी अपनी वैश्विक पहल और राष्ट्रीय प्रयास भी SCO के लिए दृढ़ता से प्रासंगिक हैं।
इस्लामाबाद में एससीओ की मुख्य बैठक होने जा रही है। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एससीओ शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल पर डॉ एस जयशंकर का स्वागत किया है।
शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान में है। एससीओ समिट के दूसरे दिन जयशंकर व्यापार और अर्थव्यवस्था को लेकर होने वाली वार्ता में भाग लेंगे।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग के बीच मुलाकात हुई है। इस दौरान जरदारी ने कहा कि चीन की आर्थिक वृद्धि का पूरी तरह से लाभ उठाने का समय आ गया है।
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