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4 साल के बेटे की हत्या करने वाली मां को उम्रकैद, कोर्ट ने सुनाया फैसला; लगाया 60 हजार का जुर्माना

 Written By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jul 19, 2026 11:24 am IST,  Updated : Jul 19, 2026 12:10 pm IST

चार साल के बेटे की हत्या करने वाली मां को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने महिला पर 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें से 40,000 रुपये पीड़ित बच्चे के पिता को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।

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प्रतीकात्मक फोटो Image Source : PIXABAY.COM

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक चौंकाने वाले मामले में अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अपने ही चार साल के मासूम बेटे की बेरहमी से हत्या करने वाली कलयुगी मां आदेश देवी को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।

विशेष अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) लोकेश नागर की अदालत ने आरोपी मां को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई। इसके साथ ही, कोर्ट ने महिला पर 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें से 40,000 रुपये पीड़ित बच्चे के पिता को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।

फावड़े से काटा, फिर शव को...

यह दर्दनाक घटना 12 जून 2024 को हीमपुर दीपा थाना क्षेत्र के जलालपुर हसना गांव में हुई थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, बच्चे का पिता कपिल कुमार जब खेतों में काम करने गया था, तभी पीछे से उसकी पत्नी आदेश देवी ने अपने ही 4 साल के बेटे हर्ष पर फावड़े से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

जब कपिल घर लौटा, तो उसने अपनी पत्नी को मासूम पर वार करते हुए देखा। यही नहीं, वारदात को छुपाने के लिए आरोपी महिला ने लहूलुहान बच्चे को जलती हुई लकड़ियों में फेंकने का प्रयास किया, ताकि शव को जलाकर सबूत मिटाया जा सके।

पति को भी दौड़ाया, नहीं बची मासूम की जान

एफआईआर के अनुसार, जब पति कपिल ने अपनी पत्नी की इस करतूत का विरोध किया और उससे सवाल पूछा, तो आदेश देवी हाथ में फावड़ा लेकर उसे भी मारने के लिए दौड़ पड़ी। कपिल ने किसी तरह अपने परिवार के सदस्यों की मदद से जलती लकड़ियों के बीच से बच्चे को बाहर निकाला और अस्पताल की तरफ भागा, लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि मासूम हर्ष ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

मानसिक बीमारी का बहाना नहीं आया काम

पुलिस ने मामले की जांच के बाद आदेश देवी के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमे के दौरान बचाव पक्ष (महिला के वकील) ने दलील दी कि महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह दिमागी रूप से बीमार है। हालांकि, अदालत ने गवाहों के बयानों और पुख्ता फॉरेंसिक सबूतों को देखने के बाद बचाव पक्ष के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि यह एक क्रूर और सोची-समझी हत्या थी। अदालत ने उम्रकैद की सजा के साथ-साथ आदेश देवी पर जो 60,000 रुपये का जुर्माना लगाया है, उसमें से 40,000 रुपये मृत बच्चे के पिता कपिल कुमार को वित्तीय सहायता के तौर पर सौंपने के निर्देश जारी किए हैं।

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