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अयोध्या के राम मंदिर में कितने करोड़ रुपए का दान आया? जानकर रह जाएंगे दंग, टैक्स की राशि भी है बहुत ज्यादा

 Reported By: Ruchi Kumar, Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Jun 08, 2026 04:20 pm IST,  Updated : Jun 08, 2026 04:23 pm IST

अयोध्या का राम मंदिर आस्था का केंद्र है इसलिए यहां हर दिन करोड़ों का चढ़ावा आता है। भक्त बढ़-चढ़कर मंदिर के लिए दान करते हैं।

Ram Mandir- India TV Hindi
राम मंदिर Image Source : INDIA TV

अयोध्या: यूपी के अयोध्या में स्थित राम मंदिर करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है और लोग मंदिर के लिए बढ़-चढ़कर दान करते हैं। अब सामने आया है कि राम मंदिर को कितना दान मिला है। मिली जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर को 3 हजार करोड़ से ज्यादा का दान आया है।

कहां हुआ दान का इस्तेमाल? कितना दिया टैक्स

मंदिर में आए दान का इस्तेमाल मंदिर के निर्माण, रखरखाव, पुजारी और बाकी कर्मचारियों की सैलरी और प्रसाद में खर्च होता है।

ट्रस्ट के मुताबिक, निर्माण कार्य में करीब 1800 करोड़ का खर्चा है, जिसमें अब तक करीब 1600 करोड़ का भुगतान हो चुका है, जिसमें 396 करोड़ टैक्स दिया गया है।

मंदिर में जो सोना-चांदी के आभूषण और कीमती सामग्री दान में आते हैं उनकी वैल्युएशन और गलाकर रखने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की मिंट संस्था  SPMCIL की है। कुछ दान सीधे बैंक खाते में आते हैं। कुछ श्रद्धालु अयोध्या में ट्रस्ट के ऑफिस में जाकर दान करते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए राम मंदिर में दान पात्र भी लगे हैं। श्रद्धालु यहां जो नकद दान करते हैं उसमें दस, बीस, पचास, सौ, पांच सौ के नोट होते हैं और सिक्के भी होते हैं।

मंदिर परिसर में ही है रुपए गिनने की मशीन

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में MOU हुआ है। एसबीआई ने मंदिर परिसर में ही रुपए गिनने की मशीन लगा रखी है। दान पेटियों को रोज खोला जाता है, पहले मशीन के जरिए नोट अलग-अलग किए जाते हैं। फिर दस, सौ, पांच सौ के नोटों की अलग अलग गड्डियां बनाई जाती हैं। सिक्के अलग काउंट होते हैं।

मशीन से कैश गिना जाता है। चढ़ावा राशि की गिनती मंदिर परिसर में बने एक कमरे में होती है और फिर इसे बक्सों में बंद किया जाता है। बड़े बक्से के अंदर छोटे-छोटे तिजोरीनुमा बक्से होते हैं और फिर कैश बैंक भेजा जाता है। इसमें ट्रस्ट के प्रतिनिधि और बैंक के लोग रहते हैं। ये सब सीसीटीवी की निगरानी में होता है। मंदिर में रोजाना करोड़ों का चढ़ावा आता है। कई बार रोज पूरे दान की गिनती नहीं हो पाती। बिना गिने कैश को बोरियों में सील करके कमरे में रखा जाता है।

अखिलेश यादव के आरोपों पर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने साधा निशाना

सपा नेता अखिलेश यादव ने हालही में राम मंदिर को लेकर बड़ा बयान दिया था। दरअसल अखिलेश ने कहा था, "समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है। ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है। न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है। सरकार की चुप्पी संदिग्ध है।"

अखिलेश के इस बयान के बाद डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का बयान सामने आया और उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा, "सपा मुखिया ने कभी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान नहीं किया। अखिलेश यादव की सोच बाबरवादी है। श्रीराम मंदिर निर्माण से पूर्व भूमि पूजन पर भी अखिलेश के कोई शब्द नहीं निकले। जब अयोध्याधाम में भव्य वास्तुकला मूर्त रूप ले रही थी, तब भी सपा मुखिया शांत रहे। प्रभु श्रीराम का विग्रह स्थापित होने पर भी अखिलेश ने कोई स्वागत नहीं किया। अखिलेश श्रीराम मंदिर को लेकर अफवाह फैला कर कर झूठ गढ़ने का असफल प्रयास कर रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश माता शबरी और भगवान जटायू की चर्चा कभी नहीं करेंगे। भारत दुनिया में सनातन संस्कृति में वाहक राष्ट्र है। सपा मुखिया महर्षि वाल्मीकि के महाकाव्य को भी भूल गए हैं। सपा मुखिया अपनी सोच को सनातन संस्कृति के विरुद्ध न करें। आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी को पुनः मुंह की खानी पड़ेगी। अखिलेश यादव के झूठ का नेरेटिव कभी सफलता तक नहीं पहुंचेगा। प्रदेश के लोग सपा की कारगुजारियों को अच्छी तरह से समझ चुके हैं।"

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