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कानपुर: लापरवाही! डॉक्टरों ने जिंदा मरीज को मृत घोषित किया, पोस्टमार्टम के लिए थाने भेजी इनफॉरमेशन, फिर...

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Dec 27, 2025 10:32 pm IST,  Updated : Dec 27, 2025 10:32 pm IST

यूपी के कानपुर के प्रसिद्ध हैलेट हॉस्पिटल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां जूनियर डॉक्टर द्वारा एक जीवित मरीज को मृत घोषित कर दिया गया और उसकी पुलिस इन्फॉर्मेशन (PI) संबंधित स्वरूप नगर थाने भेज दी गई।

Kanpur- India TV Hindi
हैलेट अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों ने लापरवाही की सारी हदें पार कीं Image Source : REPORTER INPUT

कानपुर: यूपी के कानपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सरकारी अस्पतालों में शुमार हैलेट अस्पताल (लाला लाजपतराय अस्पताल) में जूनियर डॉक्टरों ने लापरवाही की सारी हदें पार कर दी हैं।

यहां जूनियर डॉक्टर द्वारा एक जीवित मरीज को मृत घोषित करके उसकी पुलिस इन्फॉर्मेशन (PI) संबंधित स्वरूप नगर थाने भेज दी गई। पोस्टमार्टम के लिए शव लेने जब थाने की पुलिस अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में पहुंची, तो अस्पताल में मौजूद स्टाफ और पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए क्योंकि मरीज जिंदा था और सांस ले रहा था। ये घटना वार्ड नंबर 12 में उस मरीज के साथ हुई, जो कथित तौर पर सीनियर डॉक्टर ब्रजेश कुमार की देखरेख में भर्ती था।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, मरीज की तबीयत कुछ दिनों से गंभीर थी और उसे वार्ड नंबर 12 में एडमिट किया गया था। जूनियर डॉक्टरों ने बिना पूरी तरह जांच-पड़ताल किए, बिना पल्स चेक किए या अन्य जरूरी पैरामीटर्स की पुष्टि किए, उसे मृत घोषित कर दिया। 

इसके बाद उन्होंने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की और पुलिस इन्फॉर्मेशन स्वरूप नगर थाने भेज दी। थाने से पुलिसकर्मी शव को लेने अस्पताल पहुंचे। जब वे इमरजेंसी वार्ड में गए तो देखा कि मरीज बेड पर लेटा हुआ है और उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही है। पुलिस ने तुरंत अस्पताल स्टाफ को सूचना दी, जिसके बाद पूरे वार्ड में हड़कंप मच गया।

इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में अफरा-तफरी का माहौल है। वरिष्ठ डॉक्टरों और प्रिंसिपल ने तत्काल मामले की जानकारी ली और जांच के आदेश दिए हैं। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि जूनियर डॉक्टरों की यह लापरवाही न केवल मरीज की जिंदगी को खतरे में डाल सकती थी, बल्कि अगर पुलिस थोड़ी देर से पहुंचती या कोई और गलती होती तो जिंदा इंसान का पोस्टमार्टम हो जाता, जो एक बेहद गंभीर और अमानवीय कृत्य होता। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है और उसे विशेष निगरानी में रखा गया है।

अज्ञात नाम से भर्ती हुआ था मरीज

फिलहाल जिस मरीज के साथ ये घटना हुई, उसे कानपुर के गोविंद नगर पुलिस द्वारा अज्ञात नाम और पते के साथ इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। ऐसे में अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों के परिजनों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। अन्य भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही स्टाफ की कमी और लापरवाही की शिकायतें आम हैं, लेकिन इस तरह की घोर गलती स्वीकार्य नहीं है। कुछ परिजनों ने दोषी जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निलंबन की मांग की है। साथ ही, परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से मरीज की सुरक्षा और बेहतर इलाज की गारंटी मांगी है।

पुलिस ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है। स्वरूप नगर थाने के प्रभारी ने बताया कि पीआई मिलने के बाद पुलिस शव लेने पहुंची थी, लेकिन मरीज के जीवित होने की जानकारी मिलते ही उन्होंने अस्पताल प्रशासन को सूचित किया। पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है और यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

अस्पताल प्रबंधन ने जांच बिठाई

फिलहाल मामले पर अस्पताल प्रबंधन के द्वारा मामले में जांच बैठाई गयी है, मामले में अस्पताल की वाइस प्रिंसिपल डॉ ऋचा गिरी द्वारा मामले की जांच की जा रही है। जांच के उपरांत दोषी जूनियर डॉक्टर पर कार्यवाही की जा सकती है। 

यह घटना एक बार फिर उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, डॉक्टरों की ट्रेनिंग और जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े करती है। आए दिन ऐसी लापरवाही की खबरें सामने आती हैं, जिससे आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर से भरोसा उठता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जूनियर डॉक्टरों को अधिक सुपरविजन और ट्रेनिंग की जरूरत है, ताकि ऐसी जानलेवा गलतियां न हों। अस्पताल प्रशासन ने जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की है और जल्द ही रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

अस्पताल प्रबंधन का बयान सामने आया

इस मामले में लाला लाजपतराय अस्पताल (हैलेट) के SIC (सुपरिटेंडेंट इंचार्ज) डॉ आरके सिंह ने मामले का संज्ञान लिया है, ऐसे में मेडिकल कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल डॉ ऋचा गिरी के साथ डॉ आरके सिंह द्वारा लापरवाही करने वाले विभाग का निरीक्षण किया गया, इस दौरान दोनों ही अधिकारियों ने माना कि कहीं न कहीं ये बड़ी लापरवाही है। इसके बाद SIC डॉ आरके सिंह के निर्देश के बाद एक जांच कमेटी बनाई गई है जो प्रबंधन को इस पूरे मामले में अपनी एक रिपोर्ट बनाकर अगले 48 घंटों में प्रेषित करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी जूनियर डॉक्टर या जो भी इस लापरवाही का हिस्सा है उसपर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। (रिपोर्ट: अनुराग श्रीवास्तव)

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