1. Hindi News
  2. उत्तर प्रदेश
  3. 1987 में मिली आजीवन कारावास की सजा, अब 38 साल बाद कोर्ट से बाइज्जत बरी हुए, हैरान कर देगी ये घटना

1987 में मिली आजीवन कारावास की सजा, अब 38 साल बाद कोर्ट से बाइज्जत बरी हुए, हैरान कर देगी ये घटना

 Edited By: Subhash Kumar
 Published : Dec 05, 2025 06:39 pm IST,  Updated : Dec 05, 2025 08:00 pm IST

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 40 साल पुराने हत्या के एक मामले में 82 वर्षीय ओंकार सिंह को बरी कर दिया है। ओंकार सिंह कोट्रायल कोर्ट ने 1987 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

man acquitted by allahabad high court after 38 years- India TV Hindi
38 साल बाद बरी हुए 82 वर्षीय ओंकार सिंह। Image Source : REPORTER/ANI

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसे जानकर आपको बड़ी ही हैरानी होगी। दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 40 साल पुराने हत्या के एक मामले में 82 वर्षीय ओंकार सिंह नाम के शख्स को बरी कर दिया है। बता दें कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें 1987 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आइए जानते हैं इस घटना के बारे में विस्तार से।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, ये मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के अहमदगढ़ कस्बे के सतबरा गांव का है। 10 फरवरी 1985 की रात को रामजीलाल के परिवार में एक बारात आई हुई थी। तभी अचानक गांव में बदमाशों के घुसने का शोर मचा जहां रोशनी के लिए जल रही लालटेन भी बुझा दी गईं और चारों ओर अंधेरा कर दिया गया। इसी दौरान तड़ातड़ गोलियों की आवाजें गूंजने लगीं। इसी दौरान रामजीलाल के भतीजे राजेंद्र ने भी चोर-बदमाशों का शोर सुनकर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने भी बदमाशों को ललकारते हुए गोलीबारी की। इसी दौरान अंधेरा होने के कारण ग्रामीणों द्वारा चलाई जा रही एक गोली राजेंद्र के कंधे पर लगी, जिससे राजेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक राजेंद्र के परिजनों ने आरोप लगाया कि गांव के ही वीरेंद्र, ओंकार और अजब सिंह उर्फ बाली ने राजेंद्र को पकड़ लिया था। परिजनों के अनुसार, वीरेंद्र ने तमंचे से राजेंद्र को गोली मारी थी। इसके बाद, मृतक के परिजनों ने तीनों के खिलाफ राजेंद्र की हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया।

कोर्ट ने क्यों कर दिया बरी?

इस मामले में 2 दिसंबर 1987 को ट्रायल कोर्ट ने ओंकार, वीरेंद्र और अजब सिंह उर्फ बाली को धारा 302 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ तीनों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। सुनवाई के दौरान वीरेंद्र और अजब सिंह उर्फ बाली की मौत हो गई, जिसके कारण उनके खिलाफ अपील खारिज कर दी गई। वहीं, ओंकार की अपील पर सुनवाई पूरी होने के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया कि उनके खिलाफ अपराध साबित नहीं हो रहा है। इसी आधार पर अदालत ने ओंकार सिंह को दोषमुक्त घोषित करते हुए बरी करने का आदेश दिया।

गांव के लोगों ने क्या कहा?

गांव निवासी ओंकार सिंह के चचेरे भाई फतेह सिंह ने बताया कि उस वक्त मृतक राजेंद्र के चाचा रामजीलाल के घर में एक लड़की की शादी थी जहां उनके घर में बारात आई हुई थी इसी दौरान गांव में अचानक से चोर बदमाश आने का शोर मचा था सभी गांव वाले अपने लाइसेंसी हथियार लेकर रामजीलाल के घर के आसपास दौड़ लिए । वहीं रामजीलाल का भतीजा राजेंद्र भी अंदर बनी एक कोठरी से फायर कर रहा था। 

उधर गांव वाले भी चोर बदमाश समझ कर फायरिंग कर रहे थे बताया गया कि इसी दौरान राजेंद्र के गोली लगी और राजेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, मृत आरोपी वीरेंद्र की पत्नी श्रीमती ने बताया की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ओंकार सिंह को हत्या के मामले में बरी कर दिया है वह भी अब काफी खुश हैं और गांव के लोग भी हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत कर रहे हैं। हालांकि, अब राजेंद्र का परिवार गांव छोड़ कर कहीं और जा चुका है। वहीं, अब मृतक के घर के दरवाजे पर सिर्फ ताला लटका हुआ है। स्थानीय गांव के लोगों ने बताया कि सभी लोग राजेंद्र की हत्या के कुछ साल बाद गांव छोड़कर चले गए थे। (रिपोर्ट: वरुण शर्मा)

ये भी पढ़ें- घर वालों ने नहीं दी बीड़ी जलाने को माचिस, शख्स ने कुएं में कूद कर दे दी जान, हैरान कर देगा ये मामला

नोएडा में अब तक का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड, निवेश के नाम पर 12 करोड़ ठगे, 17 करोड़ और मांगे तो खुली आंखें

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। उत्तर प्रदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।