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नोएडा में ऑनलाइन ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, 16 लोग गिरफ्तार

 Reported By: Abhay Parashar Edited By: Subhash Kumar
 Published : Apr 09, 2026 06:51 pm IST,  Updated : Apr 09, 2026 06:59 pm IST

यूपी के नोएडा में पुलिस ने ऑनलाइन ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। आरोपियों के पास से कई इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किए गए हैं।

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फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस का एक्शन। Image Source : REPORTER

उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने ऑनलाइन ठगी करने वाले गैंग के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। नोएडा के सेक्टर-16 में साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है जो विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर ऑनलाइन ठगी करता था। पुलिस ने मौके से 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, इन आरोपियों के पास से 4 लैपटॉप, 15 डेस्कटॉप, 15 मॉनिटर, 16 मोबाइल फोन, माइक-हेडफोन, राउटर और मॉडम समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं।

कैसे ठगी करते थे आरोपी?

पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी इंटरनेट और सोशल मीडिया पर पेड विज्ञापन चलाकर विदेशियों को फंसाते थे। इन विज्ञापनों में टोल-फ्री नंबर दिए जाते थे। जैसे ही कोई विदेशी इन नंबरों पर कॉल करता, कॉल सीधे आरोपियों के कॉलिंग सॉफ्टवेयर पर पहुंच जाती थी। इसके बाद आरोपी खुद को टेक्निकल सपोर्ट एजेंट बताकर लोगों को डराते थे कि उनका कंप्यूटर या मोबाइल हैक हो गया है।

कंप्यूटर या मोबाइल हैक होने का डर दिखाने के बाद ये लोग स्क्रीन शेयरिंग के जरिए पीड़ित के सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे और उसकी बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे। लोगों को भरोसा दिलाने के लिए आरोपी उनके कंप्यूटर की स्क्रीन ब्लैक कर देते थे, जिससे वे घबरा जाते थे और आसानी से ठगी का शिकार हो जाते थे। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी पीड़ित के खाते में पैसे देखकर ठगी की रकम तय करते थे।

पैसों का बंटवारा कैसे होता था?

आरोपियों द्वारा पीड़ितों से कम बैलेंस होने पर 100 से 500 डॉलर तक वसूले जाते थे, जबकि ज्यादा पैसे होने पर कॉल सीनियर के पास ट्रांसफर कर दी जाती थी, जो बड़ी रकम ऐंठते थे। ठगी से कमाए गए पैसे को आरोपी क्रिप्टोकरेंसी के जरिए हवाला नेटवर्क से हासिल करते थे और आपस में बांट लेते थे। पुलिस को शुरुआती जांच में ही करोड़ों रुपये के लेन-देन के सबूत मिले हैं।

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