कोरोना काल में प्रवासी महिला मजदूरों को आपने गर्मी की कड़ी धूप में बच्चों को गोद में उठाए सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलते देखा था, तमाम तस्वीरें हम अखबारों में और टेलीविजन में देखते थे और उनका दर्द महसूस करने की कोशिश करते थे। नारी की उस शक्ति को एक पंडाल ने सम्मान देने की कोशिश की है। कोलकाता के एक पंडाल में ऐसी ही प्रवासी मजदूरों को मां दुर्गा के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं।
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कोलकाता के बेहला के बड़िशा क्लब ने इस थीम प्रतिमा को प्रस्तुत किया है, जिसमें देवी दुर्गा की गोद में कार्तिकेय रूपी बच्चे को दर्शाया गया है। आपको बता दें लॉकडाउन में करीब डेढ़ करोड़ प्रवासी मजदूर सैकड़ों किलोमीटर चलकर घर गए थे जिसमें बड़ी संख्या में औरतें और बच्चे शामिल थे।
बड़िशा क्लब के एक अधिकारी मीडिया से इस बारे में बात करते हुए कहा कि दुर्गा को शक्ति की देवी कहते हैं, हमें लॉकडाउन में दुर्गा का ये रूप कई बार देखने को मिला। एक मां अपने बच्चे के लिए कितने संगर् कर सकती है इसका सशक्त उदाहरण हम देख चुके हैं। इस अनूठी प्रतिमा को रिंटू पाल ने तैयार किया है।