Elephant Communication Infrasound: अफ्रीकी हाथी अपनी खास शक्ति की वजह से दुनिया भर में मशहूर हैं। दरअसल, अफ्रीकी हाथी Infrasound नामक एक काफी कम आवृत्ति यानी Low-frequency वाले साउंड का इस्तेमाल करके एक-दूसरे से बात करते हैं। यह आवाज 20 Hz से कम होती है और इस वजह से इंसान इसे नहीं सुन सकते हैं। इस मूक संवाद यानी Silent Communication के बारे में कुछ प्रमुख मुख्य तथ्य भी जान लीजिए।
हाथियों के संचार की दूरी कितनी?
अफ्रीकी हाथी की कम आवृत्ति वाली आवाजें इतनी दमदार होती हैं कि ये 10 से 12 किलोमीटर या उससे ज्यादा दूरी तक ट्रैवल कर सकती हैं। इसकी मदद से हाथी इतनी दूरी से ही कम्युनिकेट कर सकते हैं।
अनोखा है संवाद का तरीका
हाथी ना सिर्फ हवा के जरिए, बल्कि जमीन में कंपन यानी Seismic Vibrations उत्पन्न करके भी आपस में संवाद करते हैं, जिसे दूसरे हाथी अपने पैरों के जरिए महसूस कर लेते हैं। यह संवाद का बड़ा ही अनोखा तरीका है।
हाथी ऐसा क्यों करते हैं?
दरअसल, हाथी ऐसा करके लंबी दूरी पर होने के बावजूद एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। वे आपस में खतरे की चेतावनी भी इसके माध्यम से देते हैं। खाने के स्रोतों के बारे में साथी हाथियों को जानकारी देते हैं। वे इसकी मदद से झुंड के सदस्यों को भी ढूंढ़ लेते हैं। उनके खोने का डर कम रहता है।
कान हिलाकर सुन लेते हैं मूक आवाज
शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में पाया है कि अक्सर हाथी एक जगह शांत खड़े होकर जब अपने कान को हिला रहे होते हैं, तो असल में वे दूर से आने वाली दूसरे हाथी की मूक आवाज को सुन रहे होते हैं।
दूरी के बावजूद तालमेल का अच्छा साधन
यह कुदरत का एक अनोखा उदाहरण है जहां हाथी इस गुप्त भाषा का इस्तेमाल करके विशाल जंगलों और मैदानों में एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाए रखते हैं।
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