Scorpion Facts: आजकल सोशल मीडिया पर बिच्छू से जुड़ी कई चौंकाने वाली बातें वायरल होती रहती हैं। इनमें सबसे चर्चित है कि बिच्छू के बच्चे जन्म लेते ही अपनी मां को खा जाते हैं। लोग इसे मां की ममता की एक नायाब मिसाल बताते हैं और कहते हैं कि भूख लगने पर बच्चे मां के शरीर को नोच-नोचकर खा लेते हैं। लेकिन क्या यह पूरी तरह सच है? विश्वसनीय वैज्ञानिक अध्ययनों और जानवरों के विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ किस्से-कहानियों की बातें हैं। इसकी सच्चाई कुछ ऐसी है कि जानकर बिच्छू की वायरल कहानी पर यकीन करने वाले लोग माथा पीट लेंगे।
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मादा बिच्छू सीधे जीवित बच्चों को जन्म देती है
बिच्छू की प्रजनन प्रक्रिया खुद में काफी अनोखी है। मादा बिच्छू अंडे नहीं देती, बल्कि सीधे जीवित बच्चों को जन्म देती है, जिन्हें स्कॉर्पलिंग कहते हैं। मादा बिच्छू के एक बार में 10 से 100 तक बच्चे पैदा हो सकते हैं। ये बच्चे जन्म के समय बहुत नरम और कमजोर होते हैं, जिनका बाहरी खोल यानी कि एक्सोस्केलेटन अभी सख्त नहीं हुआ होता है। जन्म लेते ही वे मां की टांगों और पंजों पर चढ़कर उसकी पीठ पर सवार हो जाते हैं। यहां वे 10 से 20 दिनों तक रहते हैं। इस दौरान मां उन्हें शिकारियों से बचाती है, खुद ज्यादा नहीं हिलती और भोजन भी कम लेती है।
कई मामलों में मकड़ियों के बच्चे मां को खाते हैं
बिच्छू के बच्चे इस समय खुद शिकार नहीं करते, बल्कि अपनी जन्मजात ऊर्जा पर निर्भर रहते हैं। पहला मोल्ट यानी केंचुली बदलने के बाद बच्चे मां की पीठ छोड़कर अलग हो जाते हैं और अपनी जिंदगी शुरू कर देते हैं। अब मुख्य सवाल यह है कि क्या बच्चे मां को खा जाते हैं? वैज्ञानिक स्रोत जैसे एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्ययन और पुराने जर्नल रिपोर्ट्स बताते हैं कि बिच्छुओं में संतान द्वारा मां को खाने का व्यवहार सामान्य नहीं है। यह मुख्य रूप से कुछ मकड़ियों और स्यूडोस्कॉर्पियन्स में देखा जाता है, जहां भोजन की कमी में बच्चे मां के शरीर से पोषण लेते हैं।
बिच्छू मां ही अपने कमजोर बच्चों को खाती है
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि बच्चों द्वारा मां को खाने की बात भले ही गलत हो, लेकिन अगर मां को भोजन न मिले तो कभी-कभी वह अपने कमजोर बच्चों को खा जाती है, ताकि बाकी बच्चे बच सकें। यह प्रकृति का अपना तरीका है। इस बात को बगैर तथ्यों के वायरल वीडियो ने ही बढ़ावा दिया होगा कि बिच्छू पैदा होने के बाद अपनी मां को खा जाते हैं। बिच्छू की मां उन्हें पालने में बहुत मेहनत करती है यह सच है, लेकिन उनका भोजन नहीं बनती। हकीकत हमने आपको बता ही दी है कि कभी-कभी मां भले ही अपने बाकी बच्चों को बचाने के लिए कमजोर बच्चों को खाकर अपनी भूख मिटाती है।