Viral Post : विदेशी एयरपोर्ट पर भारतीय यात्रियों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए एक भारतीय उद्यमी का पोस्ट सोशल मीडिया पर तूफान ला गया है। उद्यमी विवेक शुक्ला ने बैंकॉक के डॉन मुएंग एयरपोर्ट (Don Mueang Airport) के लाउंज की फोटो शेयर करते हुए लिखा, “हम भारतीय सबसे खराब यात्री हैं।” पोस्ट में एक व्यक्ति को टेबल पर गंदे पैर रखे हुए दिखाया गया है, जो स्टाफ की बार-बार अनुरोध के बावजूद पैर हटाने को तैयार नहीं है। यह पोस्ट कुछ ही घंटों में वायरल हो गया और हजारों कमेंट्स के साथ चर्चा का विषय बन गया।
एक्स पर शेयर की पोस्ट
एक्स पर इस पोस्ट को @vivekshukla नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इस शेयर करते हुए उद्यमी ने यात्रियों के व्यवहार की आलोचना की और कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अक्सर बुनियादी शिष्टाचार की अनदेखी की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि पास के एक वर्क रूम में बच्चे लगातार अंदर-बाहर भाग रहे थे, जिससे शांति से काम करने की कोशिश कर रहे लोगों को परेशानी हो। वे लिखते हैं कि, 'हम भारतीय सबसे खराब यात्री हैं। लाउंज स्टाफ के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद यह आदमी अपने गंदे पैर मेज से हटाने को तैयार नहीं है। लगता है उसे कोई खास अधिकार है। बच्चे लगातार वर्क रूम में आ-जा रहे हैं, जिससे बाकी लोग परेशान हो रहे हैं। लेकिन माफ कीजिए, उन्हें कोई परवाह नहीं है।' इस पोस्ट ने तुरंत ऑनलाइन बहस छेड़ दी, जिसमें कई लोगों ने सार्वजनिक शिष्टाचार, सिविक सेंस और यात्रा के दौरान व्यवहार पर चर्चा की। कुछ यूजर्स ने शुक्ला से सहमति जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं आम होती जा रही हैं, जबकि अन्य का मानना था कि एक व्यक्ति के कृत्य के आधार पर सभी भारतीय यात्रियों को एक ही श्रेणी में रखना अनुचित है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने कहा कि हवाई अड्डे के लाउंज और प्रतीक्षा क्षेत्र साझा स्थान हैं जहां यात्रियों को दूसरों का ध्यान रखना चाहिए। कई लोगों ने बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर मेजों पर पैर रखना अपमानजनक और अस्वच्छ है। एक यूजर ने लिखा, 'इसीलिए बचपन से ही बुनियादी नागरिकता की भावना सिखाना जरूरी है।' दूसरे ने लिखा कि, 'लोगों को यह समझना चाहिए कि एयरपोर्ट लाउंज साझा स्थान होते हैं, न कि निजी बैठक कक्ष।' तीसरे ने लिखा कि, 'मैंने लाउंज, हवाई यात्रा और यहां तक कि होटल की लॉबी में भी ऐसा होते देखा है। कर्मचारी अक्सर ऐसे यात्रियों का सख्ती से सामना करने में हिचकिचाते हैं।'हालांकि, कुछ अन्य लोगों का कहना था कि यह मुद्दा राष्ट्रीयता से ज़्यादा व्यक्तिगत व्यवहार से जुड़ा है। एक उपयोगकर्ता ने टिप्पणी की, 'समस्या राष्ट्रीयता नहीं है, समस्या विशेषाधिकार की भावना और दूसरों के प्रति विचारहीनता है।' एक अन्य ने कहा, 'विदेश यात्रा के साथ सार्वजनिक स्थानों पर सम्मानजनक व्यवहार करने की ज़िम्मेदारी भी आती है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
ये भी पढ़ें -
भारत के राष्ट्रगान में कितने राज्यों के नाम आते हैं, सच्चे देशभक्त ही बता पाएंगे; आज जान लें जवाब
महाराणा प्रताप के हाथी का क्या नाम था, जिसे देख मुगल भी कांपते थे; चेतक समझने की गलती न करें