Reindeer Eyes: दुनिया में कई ऐसे प्राणी हैं जो अपनी अजीबोगरीब आदतों या शरीर की बनावट की वजह से दुनिया भर में मशहूर हैं। लेकिन बारहसिंगा में एक ऐसी कला होती है जो उसे बाकी दुनिया से अलग पहचान देती है। इनकी आंखों का रंग मौसम के हिसाब से बदलता रहता है। गर्मी के मौसम में बारहसिंगा की आंखों की परावर्तक परत सुनहरे-नारंगी रंग की होती है। हालांकि, सर्दियों के आने बारहसिंगा की आंखें गहरे नीले रंग की हो जाती है। आइए इसकी वजह के बारे में जानते हैं।
रोशनी के हिसाब से अनुकूलन
अब सवाल है कि बारहसिंगा में यह अनोखा बदलाव कैसे होता है। दरअसल, सर्दियों में आर्कटिक के अंधेरे की वजह से बारहसिंगा की आंखों की पुतलियां लगातार फैली हुई रहती हैं। इससे उसकी आंखों पर प्रेशर पड़ता है, जिसकी वजह से उसकी आंखों में रेटिना के पीछे मौजूद कोलेजन रेशे कस जाते हैं।
मिलता है बेहतर विजन
बारहसिंगा की आंखों में रेटिना के पीछे मौजूद रेशों में आए इस खिंचाव से उसकी आंखों का रंग ब्लू कलर का हो जाता है। यह नीले रंग की परत उजाले को अलग प्रकार से मोड़ती है, जिससे बारहसिंगा की आंखें कम रोशनी के प्रति 1 हजार गुना ज्यादा सेंसटिव हो जाती हैं। इससे वह अंधेरे में भी देख पाता है।
UV Rays देख पाना करता है मदद
कमाल की बात है कि बारहसिंगा की नीले रंग आंखें उसे UV Rays को अवशोषित करने में मदद करती हैं। इससे उनको बर्फ से ढके हुए वातावरण में भी खाने को खोजने और अंधेरे में शिकारी जानवरों से बचने में सहायता मिलती है।
California Academy Of Science में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, आर्कटिक जैसे बहुत ज्यादा ठंडे और अंधेरे वाले इलाके में जिंदा रहने के लिए बारहसिंगा की यह अनोखी क्षमता उसके लिए बहुत जरूरी है। यहां 6 महीने तक सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती है। ऐसे में बारहसिंगा की आंखों का कलर बदलकर अधिक उजाला ग्रहण करना कुदरत की एक अद्भुत व्यवस्था है। यह चीज उसे कठिन हालातों में भी जिंदा रहने में मदद करती है।
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