सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। जहां देखा जा सकता है कि एक बाल्टी के अंदर थोड़ी बहुत पानी में एक चमकदार, सिर पर गांठ वाली मछली तैर रही है। मछली का सिर देखने में इंसानी दिमाग की तरह ही लग रहा है। आपने शायद ही इससे पहले ऐसी मछली देखी होगी। तो जाहिर सी बात है कि आपको इस मछली के बारे में भी पता नहीं होगा। चलिए आज हम आपको इस मछली के बारे में बताते हैं।
ये कैसी मछली?
दरअसल, बाल्टी में नजर आ रही मछली का नाम फ्लावरहॉर्न मछली है। जो एक सजावटी मछली है। ये मछली चिक्लिड (Cichlid) परिवार से ताल्लुक रखती है। ये मछली प्राकृतिक रूप से नहीं पाई जाती, बल्कि इसे क्रॉस ब्रीडिंग की मदद से पैदा किया गया है। 1990 के दशक में मलेशिया और ताइवान में विभिन्न चिक्लिड प्रजातियों (जैसे एम्फिलोफस और ट्रिमैक) को क्रॉस-ब्रीड करके इस मछली को बनाया गया। इसे जो सबसे खास बनाता है, वह है इसका हंप (सिर पर उभरी हुई गांठ), जिसे “कोक” या “नुप” कहते हैं। ये हंप इसे शाही और आक्रामक लुक देता है, और माना जाता है कि ये मछली के स्वास्थ्य और ताकत का प्रतीक है। इसके रंग के बारे में तो बस पूछिए ही मत! लाल, नीला, हरा, पीला, और सुनहरा। ये मछली इंद्रधनुष की तरह चमकती है।
सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है ये मछली
ये मछली बेहद टेरिटोरियल होती है और दूसरी मछलियों के साथ आसानी से नहीं घुलती-मिलती। अगर आप इसे दूसरी मछलियों के साथ रखना चाहते हैं, तो बड़ा टैंक और सावधानी जरूरी है। ये मछली सिर्फ सुंदर नहीं, बल्कि स्मार्ट भी है। कई मालिक बताते हैं कि फ्लावरहॉर्न अपने मालिक को पहचानती है, उनके पास तैरकर आती है, और कभी-कभी तो “खेलने” का इशारा भी करती है। कुछ लोग इसे “जलीय कुत्ता” तक कहते हैं। फेंग शुई में फ्लावरहॉर्न को सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। खासकर इसका हंप धन और शक्ति का सूचक माना जाता है। यही वजह है कि एशियाई देशों में इसे ऑफिस और दुकानों में रखना शुभ माना जाता है। फ्लावरहॉर्न मांसाहारी है और इसे हाई-प्रोटीन डाइट चाहिए। बाजार में ब्लैक सोल्जर फ्लाई लार्वा, पेलेट्स, और फ्रीज-ड्रायड श्रिंप जैसे फूड उपलब्ध हैं। इसे नियमित और संतुलित भोजन देना जरूरी है, वरना इसका रंग और हंप फीका पड़ सकता है।
इस मछली को कैसे पालें
- फ्लावरहॉर्न को पालना आसान नहीं है, लेकिन अगर सही तरीके अपनाए जाएं, तो ये आपके एक्वेरियम की शान बन सकती है।
- इसके लिए कम से कम 100-150 लीटर का टैंक चाहिए, क्योंकि ये मछली बड़ी (12-16 इंच) और एक्टिव होती है।
- पानी का तापमान 26-30 डिग्री सेल्सियस, pH 6.5-7.5, और नियमित फिल्टरेशन जरूरी है। हफ्ते में 20-30% पानी बदलें।
- टैंक में चट्टानें, गुफाएं, और खुली जगह रखें, ताकि ये अपनी टेरिटरी बना सके। लेकिन ज्यादा सजावट से बचें, वरना ये चीजें तोड़ सकती है।
- इसे अकेले रखना बेस्ट है। अगर दूसरी मछलियां रखनी हैं, तो उनके आकार और स्वभाव का ध्यान रखें। छोटी मछलियां इसका “नाश्ता” बन सकती हैं।
- इसके रंगों को निखारने के लिए मध्यम रोशनी और नीली LED लाइट्स का इस्तेमाल करें।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।