Amazing Facts : भारत में मनाए जाने वाले प्रत्येक त्योहार में मिठाइयों का बहुत बड़ा महत्व है। होली-दीपावली से लेकर ईद और रक्षाबंधन से लेकर क्रिसमस तक कोई ऐसा त्योहार नहीं जिसमें स्वजन-ईष्टजन का मुंह मीठा कराने का रिवाज न हो। होली और ईद दोनों ही त्योहारों की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं वैसे-वैसे बाजार भी ग्राहकों से गुलजार हो रहे हैं। इन बाजारों की शोभा कुछ पारंपरिक भारतीय मिठाइयों ने और भी बढ़ा दी है। आपने अपने नजदीकी बाजारों में इन दिनों देखा होगा कि सेवईं और सूतफेनी खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में लोग जुट रहे हैं। मगर, क्या आपको पता है कि, सेवईं और सूतफेनी में क्या अंतर है ? यदि आपको नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताने वाले हैं :
वैसे तो भारत खान-पान के हर क्षेत्र में काफी विविध और समृद्धशाली है। मगर, मिठाइयों की बात आती है तो भारत का कोना-कोना अपनी स्वादिष्ट मिठाइयों के लिए दुनिया भर में काफी फेमस है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि, जब कोई बंगाल जाता है तो उसे रसगुल्ला, संदेश, मिष्टी दोई खाने की मिठास चखने को मिलती है तो राजस्थान जाने के बाद घेवर, मोहनथाल, चूरमा के लड्डू जैसे व्यंजनों का स्वाद लेने का मौका मिलता है। उत्तर भारत का गुलाब जामुन, जलेबी, गाजर का हलवा लोगों के मुंह में मिठास घोल देता है तो वहीं दक्षिण भारत का मैसूर पाक, पायसम (खीर) का स्वाद लोगों की जुबां पर चढ़ जाता है।
बाजारों से लेकर घर तक में कई ऐसी मिठाइयां हैं जिनके नाम से ही लोगों में काफी ज्यादा कन्फ्यूजन हो जाता है। मसलन, सेवईं और सूतफेनी, काला जाम और गुलाब जामुन, पेठा और कुम्हड़ा इत्यादि। वैसे ये बात और है कि खूब चटकारे लेकर खाने के बाद भी प्राय: लोग मिठाइयों के नाम के कन्फ्यूजन में फंस जाते हैं और इन मिठाइयों में अंतर नहीं कर पाते हैं।
यदि आप सेवईं और सूतफेनी मे अंतर समझना चाहते हैं तो इसमें सबसे पहला अंतर तो ये है कि, सेवईं कच्ची मिठाई है और सूतफेनी पूरी तरह से तैयार मिष्ठान्न है। सेवईं को उबालकर या भूनने के बाद उपमा या खीर के साथ खाया जाता है। जहां एक ओर सेवईं को गेहूं, सूजी या चावल के आटे से बनाया जाता है तो वहीं, सूतफेनी मैदे को घी में भूनकर चाशनी में डुबाने के बाद बनाया जाता है। सेवईं खाने में नरम (बनाने के तरीके पर निर्भर) होती है जबकि सूतफेनी बारीक, कुरकुरी और मीठी होती है। सबसे खास बात तो ये है कि, मुख्यत: सेवईं ईद पर और सूतफेनी श्रावण माह से करवा चौथ तक खाई जाती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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