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'CBI आरजी कर मामले में कोलकाता पुलिस की ‘केस डायरी’ प्रस्तुत करे', कलकत्ता हाई कोर्ट का साफ निर्देश

 Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Mar 28, 2025 09:08 pm IST,  Updated : Mar 28, 2025 09:14 pm IST

कोलकाता के आरजी कर मामले में निष्पक्ष जांच के लिए देशभर के डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया था। सीबीआई ने मामले के हर पहलू की जांच की और कई डॉक्टरों, नर्स, कर्मचारियों और अन्य लोगों से पूछताछ भी की है।

कलकत्ता हाई कोर्ट और सीबीआई- India TV Hindi
कलकत्ता हाई कोर्ट और सीबीआई Image Source : FILE PHOTO

कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को आरजी कर मामले में सख्त रुख अपनाया। हाई कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को साफ निर्देश दिया है। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश देते हुए कहा कि वह आरजी कर चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात ट्रेनी महिला डॉक्टर से बलात्कार के बाद उसकी हत्या के मामले में कोलकाता पुलिस द्वारा शुरू में तैयार की गई ‘केस डायरी’ प्रस्तुत करे। 

23 अप्रैल को है अगली सुनवाई

न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने सीबीआई को 23 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में उन लोगों की सूची सौंपने का भी निर्देश दिया, जिनसे मामले में पूछताछ की गई थी। सीबीआई ने मामले की जारी जांच को लेकर एक सीलबंद स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की। 

कोलकाता पुलिस से सीबीआई को सौंपी गई थी जांच

महिला डॉक्टर का शव 9 अगस्त, 2024 को अस्पताल के संगोष्ठी कक्ष में मिला था। अदालत ने 13 अगस्त, 2024 को मामले की जांच कोलकाता पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई का पक्ष रखने के लिए अदालत के समक्ष पेश वकील ने कहा कि वह पिछली सुनवाई के दौरान पीठ द्वारा दिये गए निर्देशानुसार ‘केस डायरी’ भी लेकर आए हैं। 

कोर्ट ने पूछा, क्या सामूहिक दुष्कर्म का संकेत मिला?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या अपराध में क्या सामूहिक दुष्कर्म का संकेत मिला है। क्या सीबीआई ने अतिरिक्त संदिग्धों की पहचान की है। सीबीआई की ओर से पेश हुए उप सॉलिसिटर जनरल राजदीप मजूमदार ने कहा कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70 (सामूहिक बलात्कार) के अंतर्गत नहीं आता है। 

डॉक्टरों का 14 सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन

उन्होंने अदालत को कहा कि अपराध स्थल से उपलब्ध सभी डीएनए नमूनों की फोरेंसिक जांच कर ली गई है और देशभर के अस्पतालों के डॉक्टरों का 14 सदस्यीय मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। मजूमदार ने कहा कि किसी फोरेंसिक साक्ष्य से सामूहिक दुष्कर्म का मामला स्थापित नहीं हुआ है और ‘डीएनए प्रोफाइलिंग’ केवल दोषी ठहराए गए आरोपी संजय रॉय पर ही की गई थी। 

सीबीआई ने की सभी पहलुओं की जांच

उन्होंने कहा कि इन रिपोर्ट के अलावा, सीबीआई ने मामले के हर पहलू की जांच की और कई डॉक्टरों, नर्स, कर्मचारियों और अन्य लोगों से पूछताछ की। कोर्ट ने इस पर कहा कि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बीच विसंगतियां पाई गई हैं। 

संजय रॉय को सत्र अदालत ने दी खौफनाक सजा

जज घोष ने रेखांकित किया कि जांच रिपोर्ट में दो चोट के निशान का उल्लेख किया गया है लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उक्त जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने सवाल किया कि सीबीआई मौजूदा समय में किस पहलु को केंद्र में रखकर जांच कर रही है। इसके जवाब में मजूमदार ने कहा कि एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि क्या अपराध के पीछे कोई बड़ी साजिश थी और क्या सबूत नष्ट करने का कोई प्रयास किया गया था। इस मामले में सियालदह की सत्र अदालत ने संजय रॉय नामक व्यक्ति को दोषी करार देते हुए मृत्यु तक कारावास में रखने की सजा सुनाई थी। (भाषा के इनपुट के साथ)

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