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TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी से छोड़ा ये पद, महुआ मोइत्रा से तकरार के बाद लिया फैसला, जानिए पूरा मामला

 Published : Aug 05, 2025 09:13 am IST,  Updated : Aug 05, 2025 10:00 am IST

टीएमसी के सीनियर सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ हुई ऑनलाइन बैठक के बाद पद छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि दीदी ने कहा की पार्टी नेताओं के बीच समन्वय की कमी है।

कल्याण बनर्जी और महुआ मोइत्रा- India TV Hindi
कल्याण बनर्जी और महुआ मोइत्रा Image Source : PTI

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सीनियर सांसद कल्याण बनर्जी ने सोमवार को लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया। कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि सांसदों के बीच समन्वय की कमी के लिए उन्हें गलत तरीके से दोषी ठहराया जा रहा है, जबकि कुछ सांसद संसद में बमुश्किल ही आते हैं।

बैठक के बाद लिया ये फैसला

कल्याण बनर्जी ने यह कदम पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की अध्यक्षता में तृणमूल सांसदों की ऑनलाइन तरीके से आयोजित एक बैठक के कुछ घंटे बाद उठाया। बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने कथित तौर पर पार्टी के संसदीय दल में खराब समन्वय पर अप्रसन्नता जताई।

दीदी ने कहा- सांसदों में समन्वय की कमी

कल्याण बनर्जी ने कहा, ‘मैंने लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक का पद छोड़ दिया है, क्योंकि 'दीदी' (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) ने ऑनलाइन बैठक के दौरान कहा था कि पार्टी सांसदों के बीच समन्वय की कमी है। इसलिए दोष मुझ पर है। इसलिए, मैंने पद छोड़ने का फैसला किया है।’ 

बनर्जी ने महुआ मोइत्रा की ओर किया इशारा

भावुक होते हुए बनर्जी ने कहा कि वह एक साथी सांसद द्वारा उनके अपमान पर पार्टी की चुप्पी से बहुत आहत हैं। उनका इशारा परोक्ष तौर पर मोइत्रा की ओर था। नब्बे के दशक से तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के साथ रहे वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने कहा, 'दीदी कहती हैं कि लोकसभा सदस्य लड़ रहे हैं और झगड़ा कर रहे हैं। क्या मुझे उन लोगों को बर्दाश्त करना चाहिए जो मुझे अपशब्द कहते हैं? मैंने पार्टी को सूचित किया, लेकिन मेरा अपमान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, वे मुझे ही दोषी ठहरा रहे हैं। ममता बनर्जी जिस तरीके से चाहें पार्टी को चलायें।’ 

राजनीति छोड़ने के बारे में भी सोच रहा हूं- कल्याण बनर्जी

उन्होंने पार्टी के आंतरिक मामलों पर अपनी असहमति व्यक्त करते हुए कहा, 'मैं इतना क्षुब्ध हूं कि मैं राजनीति छोड़ने के बारे में भी सोच रहा हूं।’ जहां कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर अपने करीबी सहयोगियों से कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है, खासकर कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा के साथ महीनों तक चले तनाव और उससे पहले पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद के साथ तनाव के बीच।

 'सुअर' जैसे अमानवीया भाषा का हुआ इस्तेमाल

कल्याण बनर्जी ने अपने इस्तीफे से ठीक पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबी पोस्ट में मोइत्रा पर उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने पोस्ट में कहा था, ‘मैंने महुआ मोइत्रा द्वारा हाल ही में एक सार्वजनिक पॉडकास्ट में की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों पर ध्यान दिया है। उनके शब्दों का चयन, जिसमें एक साथी सांसद की तुलना 'सुअर' से करने जैसी अमानवीय भाषा का प्रयोग शामिल है, न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि सभ्य संवाद के बुनियादी मानदंडों की उपेक्षा को भी दर्शाता है।’ 

दुर्व्यवहार तो दुर्व्यवहार ही होता है- बनर्जी

उन्होंने लिखा, ‘किसी पुरुष सहकर्मी को 'यौन रूप से कुंठित' कहना कोई साहस नहीं है - यह सरासर दुर्व्यवहार है। अगर ऐसी भाषा किसी महिला के लिए इस्तेमाल की जाती, तो पूरे देश में आक्रोश फैल जाता और यह सही भी है। लेकिन जब कोई पुरुष निशाना होता है, तो इसे या तो नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है या फिर सराहा जाता है। एक बात साफ है: दुर्व्यवहार तो दुर्व्यवहार ही होता है - चाहे वह किसी के साथ हो।’ (भाषा के इनपुट के साथ)

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