पश्चिम बंगाल की राजनीति में हावड़ा जिले की बाली विधानसभा सीट काफी अहम है। यह सीट हावड़ा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। पूरी तरह शहरी इलाका है, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दबदबा रहा है, लेकिन भाजपा की बढ़ती चुनौती ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। आइए इस सीट के भौगोलिक, जातीय और चुनावी पहलुओं को जानते हैं।
बाली विधानसभा क्षेत्र की आबादी में बंगाली हिंदू बहुसंख्यक हैं, लेकिन हिंदी भाषी प्रवासी और कुछ मुस्लिम समुदाय भी मौजूद हैं, जो टीएमसी के पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करते हैं। भाजपा यहां हिंदुत्व और विकास के मुद्दों पर फोकस कर रही है, जबकि वामपंथी दल (CPIM) शहरी मजदूरों के बीच अपनी पुरानी पकड़ वापस पाने की कोशिश में हैं।
हाल के चुनावों में भाजपा ने वोट शेयर बढ़ाया है, खासकर 2021 में जहां मुकाबला कांटे का रहा। टीएमसी यहां शहरी विकास और कल्याण योजनाओं पर जोर देती है, जबकि भाजपा राष्ट्रीय मुद्दों और भ्रष्टाचार के आरोपों को हथियार बनाती है। वाम दलों की गिरावट से त्रिकोणीय मुकाबला कमजोर हुआ है, लेकिन अगर वोट बंटे तो भाजपा फायदे में रह सकती है।
बाली सीट पर पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2011, 2016 और 2021) में टीएमसी ने लगातार जीत दर्ज की है, लेकिन मार्जिन घटता गया है। आइये एक नजर पिछले तीन बार के चुनावी नतीजों पर डालते हैं।
बाली विधानसभा सीट के 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी उम्मीदवार राणा चटर्जी ने 53,347 वोट पाकर जीत हासिल की। यहां दूसरे नंबर पर बीजेपी रही। बीजेपी से बैशाली दलमिया को 47,110 वोट मिले थे। तीसरे नंबर सीपीआईएम से दीप्सिता धर को 22,040 वोट मिले थे। इस सीट पर जीत का अंतर 6,237 वोटों का रहा।
2016 के बाली विधानसभा सीट में टीएमसी से बैशाली दलमिया ने 52,654 वोट से जीत दर्ज की थी। दूसरे नंबर पर सीपीआईएम के उम्मीदवार सौमेंद्रनाथ बेरा रहे थे, उन्हें 37,299 वोट मिले थे। जबकि भाजपा से कौशिक चक्रबर्ती तीसरे नंबर पर रहीं थीं। 2016 में यहां टीएमसी ने अपनी पकड़ मजबूत की, लेकिन भाजपा का उभार शुरू हो चुका था।
2011 के बाली विधानसभा चुनाव में टीएमसी से सुल्तान सिंह ने 52,770 वोट से जीत हासिल की थी। दूसरे नंबर पर सीपीआईएम की कनिका गांगुली रहीं थीं, उन्हें 46,170 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर इस सीट से भाजपा के उम्मीदवार भारत भूषण ओझा रहे थे, उन्हें 2,677 वोट मिले थे। इस सीट पर जीत का अंतर 6,600 वोट का रहा था।
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