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पश्चिम बंगाल की सियासत के उलझे सिरों को कैसे 'द्रविड़ फॉर्मूले' से सुलझाने की कोशिश में ममता बनर्जी? समझें पूरा पॉलिटिकल गेम

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Apr 08, 2026 09:00 am IST,  Updated : Apr 08, 2026 09:00 am IST

Mamata Banerjee Strategy: पश्चिम बंगाल की सियासत में सीएम ममता बनर्जी, बंगाली बनाम बाहरी के फॉर्मूले को भुनाने की कोशिश कर रही हैं। उनका ये फॉर्मूला द्रविड़ राजनीति से कैसे मैच करता है, इस खबर में जानिए।

Mamata Banerjee Strategy- India TV Hindi
ममता बनर्जी की बंगाली बनाम बाहरी की सियासत समझिए। Image Source : PTI (फाइल फोटो)

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों विधानसभा चुनाव की वजह से उबाल पर है। Anti-incumbency, लचर कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोप और आक्रामक विपक्ष- इन तमाम चुनौतियों के बीच घिरीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अपना पश्चिम बंगाल का किला बचाने के लिए एक नई स्ट्रैटेजी पर काम कर रही हैं। यह रणनीति दक्षिण भारत के राज्यों में अपनाए जाने वाले 'द्रविड़ फॉर्मूले' से काफी मैच खाती है, जिसमें राज्य की संस्कृति के गौरव और भाषा संरक्षण की खुलकर बात होती है। इस आर्टिकल में ममता बनर्जी का पॉलिटिकल गेम क्या है।

बंगाली बनाम बाहरी की सियासत

बता दें कि तमिलनाडु में द्रविड़ पार्टियों ने जिस प्रकार से तमिल अस्मिता और हिंदी-विरोध के सहारे राष्ट्रीय पार्टियों को सत्ता से दूर रखा, वहां बार-बार उत्तर भारतीय Vs दक्षिण भारतीय के नाम पर ध्रुवीकरण करने की कोशिश की, ठीक उसी तर्ज पर TMC भी 'बंगाली उप-राष्ट्रवाद' यानी Sub-Nationalism को जनता के आगे रखती है। चुनाव को बंगाली बनाम बाहरी बनाने की कोशिश करती है।

इस पॉलिटिकल गेम की असलियत क्या है?

बंगाली बनाम बाहरी की लड़ाई: बेरोजगारी, शिक्षक भर्ती घोटाला और कानून-व्यवस्था की कमियों के मुद्दों के बीच TMC, बार-बार 'बंगाली बनाम बाहरी' यानी बोहिरोगोतो का इमोशनल नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करती है। वह राष्ट्रीय पार्टियों को कई बार बाहरी बताने की कोशिश करती है। साथ ही, बंगाली भाषा के संरक्षण और उससे जुड़े गर्व की बात पर बार-बार जोर देती है।

बंगाली अस्मिता की सियासत: TMC, पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय पार्टियों को इस तरह पेश करती है कि वे पश्चिम बंगाल की संस्कृति को नहीं समझते। 'जय बांग्ला' का नारा यहां महज एक अभिवादन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय ध्रुवीकरण का नारा भी है। इसलिए हाल ही में एक चुनावी सभा में ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में बीजेपी सरकार आ गई तो आप लोग यहां चैन से अंडा, मांस और मछली भी नहीं खा पाएंगे। ये सभी अपनी मर्जी का खाना दूसरों पर थोपते हैं।

'द्रविड़ फॉर्मूले' जैसी रणनीति पश्चिम बंगाल की राजनीति के उलझे सिरों को सुलझा पाएगी, या फिर ममता बनर्जी की आक्रामक राजनीति क्षेत्रीय ध्रुवीकरण से सूबे की सियासत को और ज्यादा उलझाएगी, असली खेल इसी पर टिका हुआ है।

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