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UAE में ‘कैदियों की तरह रह रहा’ है भारतीय परिवार, मांगा कानूनी निवासी का दर्जा

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jul 06, 2018 06:42 pm IST,  Updated : Jul 06, 2018 07:09 pm IST

7 सदस्यों वाले एक भारतीय परिवार ने दावा किया है कि वह शारजाह में ‘कैदियों की तरह रह रहा’ है। परिवार के सदस्यों ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सरकार से मदद की गुहार लगाई है...

Indian family of 7 in UAE fears arrest, deportation | Pixabay Representational Image- India TV Hindi
Indian family of 7 in UAE fears arrest, deportation | Pixabay Representational Image

दुबई: 7 सदस्यों वाले एक भारतीय परिवार ने दावा किया है कि वह शारजाह में ‘कैदियों की तरह रह रहा’ है। परिवार के सदस्यों ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सरकार से मदद की गुहार लगाई है। मीडिया की खबर में शुक्रवार को कहा गया कि उन्हें गिरफ्तारी और निर्वासन के भय से मुक्ति दिलाने के लिए उनको कानूनी निवासी का दर्जा दिया जाए। खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक परिवार में 3 लोगों के पास वीजा और पासपोर्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके पास पर्याप्त खाना नहीं है और ऐेसे भी दिन आये है जब उन्हें एक काबोस (अरबी ब्रेड) पर जिंदा रहना पड़ा है।

खबर में बताया गया कि केरल के मधुसूदनन (60) और उनकी श्रीलंकाई पत्नी रोहिणी (55) ने कहा कि वे चाहते हैं कि उनके बच्चों को सामान्य जीवन मिले सके जो अपनी जिंदगी में कभी स्कूल तक नहीं गए हैं। इसमें कहा गया कि उनकी 4 बेटियां अश्वथि (29), संगीता (25), शांति (23) और गौरी (21) है तथा एक बेटा मिथुन (21) है। बेटा बेरोजगार है और अपने माता-पिता के साथ शारजाह में जीर्ण शीर्ण दो कमरे के घर में रहता है। मधुसूदनन ने कहा, ‘मैं अपने पांचों बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं दिला सका क्योंकि उनका गैर कानूनी दर्जा था। उनके पास लंबे समय तक पासपोर्ट भी नहीं था। एक दफा को छोड़कर उन्होंने UAE के बाहर यात्रा नहीं की हैं। उन्होंने ताउम्र कष्ट झेला हैं। मैं चाहता हूं कि बच्चों को बेहतर जिंदगी मिले।’

रोहिणी ने कहा, ‘बच्चे बाहर जाने में डरते हैं। हम बंदियों की तरह रह रहे हैं। मैंने अपने परिवार के लिए अपनी जिंदगी के 30 साल कुर्बान कर दिए। मेरे बच्चे बेहतर के हकदार हैं।’ मधुसूदनन 1979 में बतौर कामगार UAE आया था और उसने 1988 में रोहिणी से विवाह किया था। मधुसूदनन ने कहा कि 3 साल के बाद नौकरी चले जाने से मेरी जिंदगी पूरी तरह बर्बाद हो गई और मैं एक अवैध निवासी बन गया। उन्होंने कहा कि 1989 में बेटी के जन्म के बाद मेरी दूसरी नौकरी भी चली गई। मधुसूदनन ने कहा, 'मैं उसके पासपोर्ट के लिए भी आवेदन नहीं कर सकता था क्योंकि मैं अवैध तरीके से यहां रह रहा था। जब तक मुझे नौकरी और रेजिडेंट वीजा मिलता, मेरी पत्नी की नौकरी चली गई।' 

उन्होंने बताया कि रोहिणी 1992 तक एक स्टूडियो में बतौर सेल्स गर्ल काम करती थी। मधुसूदनन ने कहा कि मां के अवैध निवासी होने की वजह से बच्चे के पासपोर्ट के लिए आवेदन करना संभव नहीं था। दंपति ने बताया कि बड़ी बेटी को छोड़कर उनके पास सभी बच्चों के पासपोर्ट हैं, जिन्हें सामुदायिक संस्थाओं की मदद से बनवाया गया था। यह पूछे जाने पर कि 2003, 2007 और 2013 में आम माफी मिलने पर भी उन्होंने यूएई क्यों नहीं छोड़ा, मधुसूदनन ने कहा कि वह अपने परिवार को टूटने नहीं देना चाहते थे। उन्होंने कहा, 'मैं कैसे अपनी पत्नी को यहां छोड़कर भारत जा सकता था? वह श्रीलंका से हैं और उनके पास भारत का पासपोर्ट नहीं है। मेरे बच्चे अपनी मां के बिना नहीं रह सकते। मुझे अपने परिवार को इकट्ठा रखने के लिए रुकना पड़ा।'

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