बेरूत: लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने हिजबुल्लाह प्रमुख की ओर से निरस्त्रीकरण से इनकार करने के एक दिन बाद समूह से हथियार छोड़ने का आह्वान दोहराया है। लेबनान में सेना दिवस के अवसर पर बृहस्पतिवार को दिए गए भाषण में औन ने यह टिप्पणी की। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब हिजबुल्लाह पर निरस्त्रीकरण करने के लिए अमेरिकी दबाव बढ़ रहा है। औन ने कहा, "अमेरिका ने लेबनान को मसौदा विचार प्रस्तुत किए हैं, जिनमें हमने मौलिक संशोधन किए हैं, जिन्हें अगले सप्ताह के शुरू में कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।"
जोसेफ औन ने क्या कहा?
राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि लेबनानी प्रस्ताव के तहत लेबनान में "इजरायल का युद्ध तत्काल बंद" होगा जिसमें हवाई हमले और लक्षित हत्याएं, दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और इजरायल में बंद लेबनानी कैदियों की रिहाई शामिल है। उन्होंने कहा कि लेबनान अपनी ओर से ‘‘हिजबुल्लाह सहित सभी सशस्त्र बलों के हथियारों को वापस लेने और लेबनानी सेना के सामने उनके आत्मसमर्पण’’ को लागू करेगा।

हिजबुल्लाह ने क्या कहा?
औन की यह टिप्पणी बुधवार को हिजबुल्लाह नेता नईम कासेम के भाषण के बाद आई, जिसमें उन्होंने समूह के हथियारों को "लेबनान की ताकत का हिस्सा" बताया था। कासेम ने कहा था कि "जो कोई भी हथियारों सौंपने की मांग करता है, वह इजरायल को हथियार आपूर्ति की मांग कर रहा है।" हिजबुल्लाह के अधिकारियों ने कहा है कि इजरायल जब तक पूरे लेबनान से वापस नहीं लौट जाता और अपने हमले बंद नहीं कर देता तब तक वो समूह के शेष हथियारों को सौंपने पर चर्चा नहीं करेंगे।
हिजबुल्लाह के बारे में जानें
लेबनान के 1975 से 1990 तक चले गृहयुद्ध के दौरान ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने 1982 में हिजबुल्लाह की स्थापना की थी। इसको बनाने का मकसद ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति को आगे बढ़ाना और 1982 में लेबनान पर हमला करने वाली इजरायली सेना को कड़ी टक्कर देना था। आज हिजबुल्लाह काफी हद तक लेबनान की सरकार को कंट्रोल करता है और पूरे मिडिल ईस्ट में एक बड़ी मिलिट्री ताकत है। अमेरिका सहित पश्चिमी देशों और सऊदी अरब सहित अन्य अरब देशों ने हिजबुल्लाह को आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। हिजबुल्लाह एक शिया समूह है और इस्लामी गणराज्य ईरान की विचारधारा को साझा करता है। (एपी)
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