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China VS Taiwan: चीन ने ताइवान के पास दागा अपना सबसे 'सीक्रेट हथियार', अक्साई चिन में भी किया था टेस्ट, खूबियां ऐसी कि हर कोई कांपे

China VS Taiwan: चीन की सेना ने लाइव फायर अभ्यास के तहत गुरुवार को 370 मिमी पीसीएल 191 (एमएलआरएस) रॉकेट दागे। इन रॉकेटों को ताइवान जलडमरूमध्य के ऊपर से लॉन्च किया गया था। इन पर फायरिंग का मकसद ताइवान को निशाना बनाना है

Ravi Prashant Written By: Ravi Prashant @iamraviprashant
Published on: August 04, 2022 17:31 IST
China VS Taiwan- India TV Hindi News
Image Source : PTI China VS Taiwan

Highlights

  • इस रॉकेट की मारक क्षमता 350 किलोमीटर है
  • हाइपरसोनिक मिसाइलों तक हर चीज का इस्तेमाल कर रही है
  • ताइवान दक्षिण-पूर्वी चीन के तट से लगभग 160 किमी दूर एक द्वीप है

China VS Taiwan:  चीन की सेना ने लाइव फायर अभ्यास के तहत गुरुवार को 370 मिमी पीसीएल 191 (एमएलआरएस) रॉकेट दागे। इन रॉकेटों को ताइवान जलडमरूमध्य के ऊपर से लॉन्च किया गया था। इन पर फायरिंग का मकसद ताइवान को निशाना बनाना है। चीन से दागे गए इस रॉकेट की मारक क्षमता 350 किलोमीटर है। यह जानकारी चीन की स्थानीय मीडिया ने दी है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की ओर से बताया गया है कि ताइवान के करीब जो सैन्य अभ्यास हो रहा है, उसके तहत ताइवान को समुद्र से लेकर जमीन तक और हवा में भी घेराबंदी की जा रही है. ड्रिल में चीनी सेना J-20 स्टील्थ फाइटर जेट्स से लेकर DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइलों तक हर चीज का इस्तेमाल कर रही है।

चीन का रहस्यमई हथियार

चीन द्वारा दागे गए रॉकेट को रक्षा विशेषज्ञों ने 'रहस्यमय हथियार' बताया है। इस रॉकेट सिस्टम (MLRS) का परीक्षण ऐसे समय में किया गया जब पूर्वी लद्दाख में भारत के साथ तनाव चल रहा था। चीन ने हाल ही में लद्दाख के करीब इसका परीक्षण किया था। इसकी अधिकतम रेंज 500 किमी बताई जा रही है लेकिन इस पर थोड़ा संदेह जताया गया है। कुछ लोग इसकी रेंज 350 किमी बताते हैं। PCL-191 एक ट्रक लॉन्च रॉकेट सिस्टम है जो 370 मिमी रॉकेट को आसानी से लॉन्च कर सकता है।

यह प्रणाली आठ रॉकेटों को 350 किमी की दूरी तक ले जा सकती है या 750 मिमी फायर ड्रैगन 480 स्पर्शनीय बैलिस्टिक मिसाइलों को ले जा सकती है। इन मिसाइलों की मारक क्षमता 500 किमी से अधिक है। इस रॉकेट सिस्टम की झलक सबसे पहले चीन ने साल 2019 में राष्ट्रीय दिवस परेड के दौरान दुनिया को दिखाई थी. इस सिस्टम को पीएलए का सबसे एडवांस सिस्टम बताया जा रहा है. इसके अलावा ग्लोबल टाइम्स की ओर से बताया गया है कि पीएलए की ईस्टर्न कमांड रॉकेट फोर्स ने ताइवान के पूर्व के कई चिन्हित हिस्सों की ओर कई तरह की पारंपरिक मिसाइलें दागी हैं।

क्या हैं दोनों देश का विवाद

ताइवान दक्षिण-पूर्वी चीन के तट से लगभग 160 किमी दूर एक द्वीप है, जो फूजौ, क्वानझोउ और जियामेन के चीनी शहरों के सामने है। यहां शाही किंग राजवंश का शासन चलता था, लेकिन इसका नियंत्रण 1895 में जापानियों के पास चला गया। द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद, ये द्वीप वापस चीनी हाथों में चला गया। माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्टों द्वारा मुख्य भूमि चीन में गृह युद्ध जीतने के बाद, राष्ट्रवादी कुओमिन्तांग पार्टी के नेता च्यांग काई-शेक 1949 में ताइवान भाग गए। च्यांग काई-शेक ने द्वीप पर चीनी गणराज्य की सरकार की स्थापना की और 1975 तक राष्ट्रपति बने रहे।

चीन ने कभी भी ताइवान के अस्तित्व को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं दी है। उसका तर्क है कि यह हमेशा एक चीनी प्रांत था। ताइवान का कहना है कि आधुनिक चीनी राज्य 1911 की क्रांति के बाद ही बना था, और यह उस राज्य या चीन के जनवादी गणराज्य का हिस्सा नहीं है, जो कम्युनिस्ट क्रांति के बाद स्थापित हुआ था। दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव जारी है। आपको बता दें चीन और ताइवान के आर्थिक संबंध भी रहे हैं। ताइवान के कई प्रवासी चीन में काम करते हैं और चीन ने ताइवान में निवेश किया है।

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